सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकार विनोद दुआ के खिलाफ सेडिशन केस रद्द किया

नई दिल्ली: वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ को बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने दुआ के खिलाफ हिमाचल प्रदेश में दर्ज राजद्रोह के मुकदमे को खारिज कर दिया है। बता दें कि विनोद दुआ की ओर से एक यूट्यूब प्रोग्राम में प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार के खिलाफ कथित तौर पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर भाजपा के एक स्थानीय नेता ने एफआईआर दर्ज कराई थी।
जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस विनीत शरण की पीठ ने अपने आदेश में विनोद दुआ के खिलाफ राजद्रोह (आईपीसी की धारा-124ए) सहित अन्य अपराधों के तहत दर्ज मुकदमे को निरस्त कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सभी पत्रकार, केदारनाथ सिंह फैसले के तहत संरक्षित हैं।
इस फैसले में राजद्रोह कानून को सही ठहराया गया था लेकिन इसमें इस कानून का दायरा तय किया गया था। हालांकि कोर्ट ने पत्रकारों पर लगे आरोपों को सत्यापित करने के लिए समिति के गठन की विनोद दुआ की मांग को ठुकरा दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने विनोद दुआ की ओर से दायर की गई दूसरी याचिका को खारिज कर दिया। इसमें एफआईआर दर्ज करने से पहले पत्रकारों के खिलाफ आरोपों को सत्यापित करने के लिए एक समिति बनाने की मांग की गई थी और कहा गया था कि 10 साल से अधिक के अनुभव वाले पत्रकार के खिलाफ कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की जानी चाहिए जब तक कि समिति द्वारा मंजूरी नहीं दी जाती। कोर्ट ने कहा कि यह मसला विधायिका के अधिकार क्षेत्र में आता है।
विनोद दुआ के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने वाले भाजपा नेता श्याम का कहना था कि दुआ ने अपने यू ट्यूब कार्यक्रम ‘द विनोद दुआ शो’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर वोट पाने की खातिर ‘मौत और आतंकी हमलों’ का इस्तेमाल करने के आरोप लगाए हैं। श्याम का कहना था कि इस तरह के बयान से शांति और सांप्रदायिक वैमनस्य पैदा हो सकता था।

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