कोरोना काल में गर्भवती और नवजात की मौत में एक-तिहाई की वृद्धि

कोरोना काल में गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं पर इसका गंभीर असर पड़ा है। इस दौरान गर्भवती और नवजात की मौत में एक-तिहाई की वृद्धि हुई है। इसका खुलासा लैंसेट पत्रिका में प्रकाशित हुई वैश्विक अध्ययन पर आधारित एक रिपोर्ट से हुआ है। 

17 देशों में किए 40 अध्ययनों के डाटा की समीक्षा पर निकलकर सामने आए हालात चिंताजनक है। पत्रिका में बुधवार को प्रकाशित समीक्षा में पाया गया कि कोरोना काल में गर्भवती और नवजात की मौत में एक-तिहाई की वृद्धि हुई है। 2020, जनवरी और 2021, जनवरी के बीच समीक्षा में मिली कि एक्टोपिक गर्भधारण में लगभग छह गुना वृद्धि हुई थी।

सेंट जॉर्ज यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के शोधकर्ताओं ने निर्धारित किया कि इन समस्याओं में से कई महामारी के दौरान चिकित्सा देखभाल तक पहुंच की कमी से उपजी हो सकती हैं। इसके अलावा अस्पतालों को कोविड -19 रोगियों के साथ इलाज करने से मना किया गया था। इसके साथ ही कुछ महिलाएं डॉक्टर के पास भी नहीं जाना चाहती हैं।

अध्ययन में यह भी पाया गया कि शोधकर्ताओं द्वारा मूल्यांकन किए गए 10 अध्ययनों में से छह के अनुसार अवसाद के लक्षणों की सूचना देने वाली महिलाओं की संख्या में भी वृद्धि हुई। इस दौरान मातृ चिंता की दरें भी अधिक थीं। वैश्विक स्तर पर एक दर जो बहुत नहीं बदली, वह है प्री-टर्म बर्थ की संख्या।  

तुर्की की कोक यूनिवर्सिटी के अध्ययन के सह-लेखक डॉ. एरकान कलाफात ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इस अध्ययन से पहले जन्म के बारे में उन्होंने जो कुछ सीखा है, वह शोधकर्ताओं को इसे बेहतर ढंग से समझने के लिए प्रेरित करेगा। उन्होंने कहा कि हमारे पास दुनिया भर में समावेशी और समान मातृत्व देखभाल के भविष्य के लिए योजना बनाने के लिए कोरोना महामारी के अनुभवों से सीखने का एक अभूतपूर्व अवसर है।

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