स्मार्ट मीटर जनता की सुविधा बने, परेशानी नहीं” बस्तर में स्मार्ट मीटर को लेकर बढ़ीं शिकायतें, बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा ने सरकार से मांगा तकनीकी ऑडिट, जनसुनवाई और बिलिंग पारदर्शिता का जवाब

तकनीक का विरोध नहीं, लेकिन जनता के अधिकारों से समझौता स्वीकार नहीं” — नवनीत चाँद
जगदलपुर। बस्तर संभाग में स्मार्ट मीटर योजना को लेकर सामने आ रही उपभोक्ताओं की शिकायतों के बीच बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) ने सरकार और विद्युत विभाग से योजना के क्रियान्वयन में पूर्ण पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की है। संगठन के मुख्य संयोजक एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के बस्तर संभाग अध्यक्ष नवनीत चाँद के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) बस्तर वृत्त के अधीक्षण अभियंता को विस्तृत जनहित ज्ञापन सौंपा।
प्रतिनिधिमंडल में महिला मोर्चा अध्यक्ष प्रिया यादव, जिला महामंत्री संतु कश्यप, शहर महामंत्री निहारिका सिंह सहित संगठन के पदाधिकारी उपस्थित रहे। ज्ञापन की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, ऊर्जा विभाग, छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग, सीएसपीडीसीएल के प्रबंध संचालक, बस्तर संभागायुक्त तथा बस्तर संभाग के सभी कलेक्टरों को भी भेजी गई है।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि बस्तर संभाग के विभिन्न जिलों से स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद बिजली बिलों में वृद्धि, मीटर रीडिंग की पारदर्शिता, डेटा गोपनीयता, पूर्व सूचना के अभाव और शिकायत निवारण प्रणाली को लेकर लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। संगठन का कहना है कि ऐसी स्थिति में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए स्वतंत्र तकनीकी परीक्षण और सार्वजनिक जवाबदेही आवश्यक है।
नवनीत चाँद ने कहा कि बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा आधुनिक तकनीक और डिजिटल सुधारों का विरोध नहीं करता, लेकिन किसी भी योजना का उद्देश्य जनता को सुविधा देना होना चाहिए, न कि भ्रम और असंतोष की स्थिति पैदा करना। उन्होंने कहा कि सरकार यदि स्मार्ट मीटर व्यवस्था को पूरी तरह विश्वसनीय मानती है तो स्वतंत्र तृतीय-पक्ष तकनीकी ऑडिट, सार्वजनिक जनसुनवाई और तकनीकी रिपोर्ट सार्वजनिक करने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
ज्ञापन के माध्यम से संगठन ने आठ प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें स्वतंत्र तृतीय-पक्ष तकनीकी ऑडिट, प्रत्येक जिले में जनसुनवाई, सभी उपभोक्ताओं को मीटर की Accuracy Test रिपोर्ट उपलब्ध कराना, विशेष हेल्पडेस्क की स्थापना, बिजली बिलों में वृद्धि की स्वतंत्र जांच, पोस्टपेड विकल्प की स्पष्ट नीति, स्मार्ट मीटर से जुड़े अनुबंध एवं तकनीकी दस्तावेज सार्वजनिक करना तथा उपभोक्ताओं के लिए Opt-Out Policy पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करना शामिल है।
संगठन ने कहा कि ये सभी मांगें भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 19 एवं 21, विद्युत अधिनियम, 2003, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 तथा प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप हैं। सार्वजनिक सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था की मूल आवश्यकता है।
मुख्य मांगें एक नजर में
– स्मार्ट मीटरों का स्वतंत्र तृतीय-पक्ष तकनीकी ऑडिट।
– प्रत्येक जिले में सार्वजनिक जनसुनवाई।
– प्रत्येक उपभोक्ता को Accuracy Test रिपोर्ट।
– विशेष स्मार्ट मीटर हेल्पडेस्क एवं समयबद्ध शिकायत निवारण।
– बिजली बिलों में वृद्धि की स्वतंत्र जांच।
– पोस्टपेड व्यवस्था का विकल्प।
– सभी अनुबंध, तकनीकी मानक एवं परीक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक करना।
– उपभोक्ताओं के लिए Opt-Out Policy पर स्पष्ट दिशा-निर्देश।
प्रमुख बयान
«”बिजली उपभोक्ता केवल बिल भरने वाला नहीं, बल्कि व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण हितधारक है। सरकार की जिम्मेदारी है कि हर नई तकनीक को जनता के विश्वास, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ लागू करे। हम तकनीक के विरोधी नहीं, बल्कि जनता के संवैधानिक और उपभोक्ता अधिकारों के पक्षधर हैं।”


