जोशीमठ: रात में होटल, और दिन में टूटे घरों से समेट रहे सामान

जोशीमठ में घर के आंगन में सोमवार सुबह 8 बजे अनिता अपनी सिलाई मशीन को खोलकर पैक कर रही थीं। वैसे तो वह टीचर हैं, लेकिन सिलाई के शौक के लिए पैरे से चलने वाली मशीन घर में चलाती थीं। रेलिंग के सहारे कहीं शादी की तस्वीर रखी थी तो कहीं बच्चे की खिलखिलाती तस्वीरें।
कभी ये तस्वीरें घर की दीवारों की शोभा बढ़ाती थी, लेकिन दरारभरी दीवारों से इन्हें उतार दिया है। टीवी, वाशिंग मशीन, सोफा सेट, बिस्तर समेत घर का आधा से ज्यादा सामान बाहर अंगन में इधर-उधर बिखरा पड़ा था। पूछने पर बताया कि प्रशासन ने घर को असुरक्षित बताते हुए छोड़ने के लिए कह दिया है, इसीलिए सामान को समेटकर सुरक्षित जगह रख रहे हैं।
भूधंसाव प्रभावित क्षेत्र मोहनबाग में अनिता का घर है। उनके आसपास उत्तरा पांडे, दलवीर सिंह, चंद्र बल्लभ का घर भी क्षतिग्रस्त हो गया, जिसे खाली कराया जा रहा है। अनिता के पति संतोष बिष्ट की बाजार में मोबाइल की दुकान है। संतोष ने बताया कि इस घर में उनका चार लोगों का परिवार रहता है।
करीब दस कमरों का उनका दो मंजिला घर है। ग्राउंड फ्लोर में हिस्से में चार किरायेदार थे, जो अब खाली कर चुके हैं। बाकी छह कमरों में उनका अपना सामान भरा पड़ा है। नीचे का एक बड़ा हॉल थोड़ा सुरक्षित है, कुछ सामान वहां डाल रहे हैं। कुछ जरूरत का सामान रिश्तेदारों के यहां रखवा रहे हैं। समझ नहीं आ रहा यहां क्या रखें और क्या ले जाएं। बच्चे की पढ़ाई की चिंता भी सता रही है।

लाल निशान दिखाते हुए बोली गीता-अब कहां जाएं
नीलम और गीता परमार देवरानी और जेठानी हैं। दोनों का परिवार मोहनबाग स्थित पुस्तैनी घर में रहता है। घर के मुखिया धीरेंद्र परमार और रोहित परमार कारोबार से जुड़े हैं। उनके घर को असुरक्षित घोषित कर दिया है। रविवार रात को प्रशासन की टीम ने घर में रहने से मना कर दिया।
रात को बच्चों समेत सभी नगर पालिका के पास एक होटल में रहने गए। सोमवार सुबह दोनों देवरानी और जेठानी सामान सुरक्षित रखने के लिए घर आईं थीं। घर पर लगा लाल निशा दिखाते हुए नीलम बताती हैं कि बाहर से निशान लगा दिया। अंदर तो हमारा इतना सारा सामान है। कहां ले जाएं। होटल के एक कमर में कैसे इतना बड़ा परिवार रहेगा, न वहां खाना बनाने का है। बहुत परेशान हैं। तबीयत भी खराब होने लगी है। सर्दी-जुकाम हो गया है।
एक डबल बेड में रह रहा पूरा परिवार
संतोष बिष्ट ने बताया कि उन्हें औली जाने वाले मार्ग पर जीएमवीएन के गेस्ट हाउस में अस्थाई रूप से ठहराया गया है। एक कमरा मिला हुआ है। उसमें एक डबल बेड में उनके परिवार के चार लोग रह रहे हैं। इसमें दो महिलाएं शामिल हैं। पत्नी अनिता कहती हैं कि तबीयत ठीक नहीं है। वह तो रात में जैसे-तैसे रह गए, उनका कुत्ता नहीं रह पाया। कुत्ते को कहां ले जाएं। संतोष बताते हैं कि गेस्ट हाउस में ज्यादा दिन नहीं रहे पाएंगे। इसलिए दूसरी जगह कमरा लेकर रहना पड़ेगा।

जहां लोगों ठहराया जा रहा वहां भी दरारें
जोशीमठ नगर में अधिकांश भवनों में दरारें देखी जा रही हैं। कहीं मामूली दरारें हैं तो कहीं दरारों ने भयानक रूप ले लिया है। कुछ लोगों को नगर पालिका गेस्ट हाउस में ठहराया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उस भवन के निचले हिस्से में हल्की दरारे हैं। इसी तरह जिन होटलों में भी लोगों को ठहराया गया है, वहां भी हल्की दरारें देखी जा रही हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में दरारें बढ़ती हैं तो जहां लोगों को शिफ्ट किया है, वह जगह भी छोड़नी पड़ सकती है।



