तुम कितने पत्थरदिल, बेवफा हो… कहते हो शहर की तस्वीर बदली है।।

चाँदनी चौक:चर्चा-ए-चौराहा.. बेबाक अनकही कहानियां/नवीन श्रीवास्तव पत्रकार, ,स्तंभ कार, लेखक…बस्तर से
कथनी – करनी में भेद से जन्मा कचरा… अब पहाड़ जैसे शक्ल लिए धीरे- धीरे आसपास जहर बांटता.. गुर्रा रहा है .. गुरररर …..हूं नंरररर.. मानो पूछ रहा हो … है कोई माई का
लाल…(आगे पढ़ें..)
जगदलपुर चांदनी चौक… वर्षों से इस शहर के बदलते दौर का साक्षी बन खडा है… अपनी देह पर एक तरफ जिंदगी बांटने वाला महारानी अस्पताल और दूसरी तरफ …नशेमन शराब की दुकान लिए जैसे कह रहा हो पहले विसंगतियों को दूर करो.. इतने समय में कितना कुछ बदला ..बदली तस्वीर, बदले चेहरे ,बदले वादे पर तकदीर …शहर की तकदीर कितनी बदली… ???
तकदीर बदले भी तो कैसे …बदले भी तो कैसे बताइए जब… जब मूंछों पर ताव देने वाले बड़ी-बड़ी बातें करने वाले वालों के कथनी – करनी में भेद हो … एक महारानी अस्पताल को ही जाकर देखिए ..यह केवल अस्पताल नहीं है बल्कि न केवल जगदलपुर बल्कि समूचे बस्तर की गरिमा है … इस अस्पताल के सामने जाइए जहां लिखा है “मेरा शहर स्वच्छ शहर… आई साथ मिलकर अपने नगर को बनाए फाइव स्टार …. वहीं इसी अस्पताल के दूसरे दरवाजे पर शहर में स्वछता, साफ- सफाई को लेकर बड़ी बड़ी बातें करने वालों को मुंह चिढ़ाता …कूड़े ,कचरे ,राख का पहाड़ महीनों से इकट्ठे होते जा रहा है .. यहां काफी समय से कचरा फेंका एवं जलाया जाता रहा है!!!!.. परंतु अब अस्पताल की गरिमा को अंगूठा दिखाता..नियम कायदों की पोंगरी बजाता ..कचरों का यह ढेर विशाल पहाड़ में तेजी से बदलते रहा है.. जैसा कोई राक्षस हो.. .. धृतराष्ट्र बने अस्पताल प्रबंधन के साथ स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े जिम्मेदार लोगों के दायित्वहीनता से निकला कचरा, स्वच्छता के नाम पर बड़ी-बड़ी डींगे हांकने वालों के कथनी करनी में भेद का कचरा… निगम प्रशासन और दूसरे जिम्मेदार प्रशासन के लापरवाही से पनपता कचरा, नाक उठाकर घूमने वालों के जन प्रतिनिधियों के खोखले व्यक्तित्व से जन्मा कचरा… अब पहाड़ जैसे शक्ल लिए धीरे धीरे आसपास जहर बांटता.. गुर्रा रहा है .. गुरररर …..हूं नंरररर.. मानो पूछ रहा है कोई माई का लाल… बताओ बताओ है कोई माई का लाल????


