नारायणपुर की दुर्दशा को लेकर मुक्ति मोर्चा -जोगी कांग्रेस ने दिया धरना, दिया नारा अभी तो यह अंगड़ाई है आगे और लड़ाई है


नारायणपुर का चारों तरफ का सड़क, का निर्माण नहीं, तो मुक्ति मोर्चा -जोगी कांग्रेस, नारायणपुर वासियो के साथ निक्को-बी एस पी सड़क लौह ट्रांसपोर्टेशन करेंगे बंद-मुक्ति मौर्चा-जोगी कांग्रेस
बस्तर के नेता जिनके बदौलत सत्ता में है उन्हें भूल गए हैं परंतु उनकी तानाशाही नहीं चलेगी- नवनीत चांद
नारायणपुर।नारायणपुर पहुंचे बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा के प्रमुख संयोजक श्री नवनीत चांद के नेतृत्व में मोर्चा के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं ने आज बस्तर नारायणपुर क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं के समाधान को लेकर धरना दिया और कलेक्टर के नाम ज्ञापन सोपा है ।इस दौरान अभी तो यह अंगड़ाई है आगे और लड़ाई है जैसे जोश से भरे नारे हवाओं में गूंजते रहे।विकास से वंचित नारायणपुर के अधिकार को लेकर मोर्चा के संयोजक के साथ उपस्थित पदाधिकारी, कार्यकर्ताओं ने अपनी बात रखी ।
श्री नवनीत ने कहा कि बस्तर की चुने जनप्रतिनिधि सत्ता में पहुंचने के बाद जनता को भूल गए नारायणपुर का हाल भी इसीलिए है यह नारायणपुर के साथ धोखा है परंतु यह तानाशाही नहीं चलेगी।
मुक्ति मोर्चा के संयोजक ने कहा कि यहां अस्पताल की दुर्दशा बहुत ही दुखद है खनिज संपदा की लूट का असर बस्तर में महसूस किया जा सकता है आदिवासियों के अधिकारों का हनन हो रहा है,धार्मिक अस्थिरता आर्टिकल 25 का उल्लंघन यहां विचारणीय और अफसोसजनक है।
बस्तर बेटा अपने आगे कहा कि नारायणपुर की जनता गंभीर समस्याओं से पीड़ित हैं यहां बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं है यहां के जनता के बदौलत सत्ता में पहुंचकर लोगों को राजनीति से फुर्सत नहीं है । यहां लोग पानी बिजली सड़क के लिए तरस रहे हैं। नारायणपुर क्षेत्र की समस्याओं को उठाते हुए मुक्ति मोर्चा ने इस तरह से अपनी मांगों को सामने रखा है: –
1. सड़क की दयनीय स्थिति – क्षेत्र की अधिकांश सड़कें अत्यधिक जर्जर एवं गड्ढों से भरी हुई हैं। आवागमन में कठिनाई, दुर्घटनाओं का खतरा और बरसात में स्थिति और विकट हो जाती है।
2. बिजली की समस्या – बार-बार बिजली गुल होना और वोल्टेज की समस्या से ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्र प्रभावित हैं। छात्रों की पढ़ाई, किसानों की सिंचाई और व्यवसाय सभी पर असर पड़ता है।
3. खनिज खदानों का दुष्प्रभाव – खदानों से निकलने वाला लाल पानी किसानों की ज़मीन तक पहुँच रहा है, जिससे फसलें खराब हो रही हैं और भूमि की उर्वरकता घट रही है।
4. स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी – अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त डॉक्टर, दवाइयाँ व उपकरण नहीं हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को सही समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा।
5. शिक्षा व्यवस्था कमजोर– कई विद्यालय भवन जर्जर हैं और शिक्षकों की भारी कमी है। बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है।
6. पेयजल संकट – गर्मियों में कई गाँवों में पीने के पानी की भारी किल्लत हो जाती है। हैंडपंप और टैंकर पर्याप्त नहीं हैं।
7. रोजगार के अवसरों की कमी – युवाओं के लिए रोजगार के साधन उपलब्ध नहीं हैं। स्वरोजगार योजनाएँ भी ज़मीनी स्तर पर ठीक से लागू नहीं हो रही हैं।
8. ग्रामीण विकास योजनाओं का क्रियान्वयन – शासकीय योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक समय पर नहीं पहुँच पाता। कई योजनाएँ कागज़ों तक ही सीमित हैं। इस दौरान इस दौरान जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जे एवं बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा के पदाधिकारी के रूप मेंबसंत मुरेठी राजमान मुरेठी बुधराम ज्वेलरी सुखमण गोटा दिनेश कोरमा सुकुडू ध्रुव सोनवा राम नूरेठी सोमनाथ कुटाई अशोक गावडे राजूराम कचोलाम संपत को अच्छी श्याम सिंह नूरेती श्यामलाल नूरेती सुरेश कवाची जितेश सलाम परशुराम मूरति रईस मांडवी सुखमण कोरमा गुड्डू राम सलाम सोनू राम बर्डे गुल्लू कुमेडी आदि पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित थे



