बस्तर में गरीब और पीड़ित लोगों को घर बनाने 5 लाख नहीं मिल रहा,अब पूंजीपतियों को 45% की सब्सिडी — मुक्ति मोर्चा संयोजक नवनीत चांद

बस्तर में होटल व्यवसाय को उद्योग दर्ज देकर 45% सब्सिडी पर मुक्ति मोर्चा की तीखी प्रतिक्रिया*
जगदलपुर, बस्तर में सड़कों से लेकर खेत कर और जंगलों में रहने वाले ग्रामीण और आदिवासियों की समस्याओं एवं जनहित मुद्दों को लेकर लगातार सक्रिय एवं अपनी आवाज बुलंद करते प्रस्तुत अधिकार मुक्ति मोर्चा के प्रमुख संयोजक श्री नवनीत चांद ने कहा है कि – गरीब लोगों को घर बनाने 5 लाख नहीं मिल रहा है… परंतु पर्यटन की आड़ में होटल व्यवसाय को उद्योग का दर्जा देकर जनता के पैसे को सब्सिडी बना रेवड़ी की तरह बांटना बिल्कुल भी उचित नहीं है ,सरकार इस पर पुनर्विचार कर संशोधन करें। श्री नवनीत ने कहा कि इस विषय को लेकर कलेक्टर के माध्यम से हम अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपेंगे सरकार समय में हमारी बातों को नहीं मानती है तो मुक्ति मोर्चा इस विषय में हाई कोर्ट जाकर जनहित याचिका लगाने विवश होगी ?
होटल व्यवसाय पर सरकार द्वारा 45% सब्सिडी देने के साथ स्थानीय लोगों को रोजगार देने के नाम पर भी इस तरह के व्यवसाईयों को सब्सिडी देने के फैसले को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मोर्चा के नेता श्री नवनीत चांद ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से कहा है कहा – यह बस्तर संभाग के यह बस्तर के सेठ , धनपतियों के कर्ज को माफ करने का नया तरीका है,इस तरह से 45% सब्सिडी का मतलब बैंक का आधा कर्ज माफ की सीधे-सीधे पूंजीपतियों को लाभ दिलाने की तरफ क्या अग्रसर नहीं है, बस्तर में होटल के बड़े व्यवसाईयों को सीधे तौर पर फायदा पहुंचाने का योजना नहीं है ?
उन्होंने कहा कि इस योजना से कितने गरीब को और कैसे फायदा होगा क्या यह सरकार बता सकती है सरकार जानती है कि आदिवासी अंचल में एक दो प्रतिशत आदिवासी ही होटल के बड़े व्यवसाय से जुड़े हुए हैं, और सरकार यह भी जानती है की होटल व्यवसाय में उत्पन्न रोजगार में बस्तर के मात्र 30% युवा ही शामिल है बाकी सब अन्य राज्यों से आकर बस्तर में उत्पन्न रोजगार को अतिक्रमित कर रहे हैं, उन्होंने आगे कहा कि बाढ़ आपदा में जिनका सब कुछ बर्बाद हो गया है उनको सरकार के द्वारा बाढ़ आपदा अधिनियम का हवाला देकर मात्र 120000 (1 लाख 20 हजार रुपए) दिया जा रहा है! वही बड़े व्यवसाईयों का कर्जा मुक्त करने के लिए होटल को पर्यटन के नाम पर उद्योग का दर्जा दिया जा रहा है !
मुक्ति मोर्चा ने कहा कि पर्यटन विभाग द्वारा बस्तर संभाग में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए जो मोटल- रिजॉर्ट तैयार किए गए थे लाखों रुपए सुविधा के नाम पर खर्च किए गए पर आज तस्वीर क्या है पर्यटन के नाम पर आह भरने वाली सरकार को पता है कि नहीं कि 10 से भी अधिक पर्यटन स्थल बस्तर में है परंतु यहां जाने ना ठीक से संकेतक भी नहीं है!
उन्होंने कहा कि अगर देना ही है तो सभी धंधे को स्थानीय धंधे को रोजगार को व्यापार को बढ़ाने सरकार मदद करें जो 50 लाख 1 करोड़ जैसे मंझोले, छोटे व्यवसाय कर रहे हैं ।क्या राज्य सरकार की राशि जो की जनता की धन है उसे अपने कर्ज को चुकाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है ?
उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा कि जबकि उक्त राशि का इस्तेमाल राज्य के गरीब तबके को छोटे-छोटे व्यवसाय में अनुदान देकर आर्थिक रूप से विकसित किया जा सकता है परंतु या भाजपा की सरकार केंद्र सरकार के नक्शे कदम पर चलकर पूंजीपतियों को और पूंजीपति बनाने में अपनी योजनाओं को संचालन कर रही है, सरकार नक्सलवाद के नाम पर आपदा को अवसर के रूप में बना रही है, और अपने पूंजीपति दोस्तों का कर्ज माफ करने का कोशिश कर रही है 45% सब्सिडी का मतलब बैंक का आधा कर्ज माफ की सीधे-सीधे पूंजीपतियों को लाभ दिलाने की तरफ अग्रसर कम है बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ की गरीब विरोधी और पूंजीपति समर्थक इस योजना का पुरजोर विरोध करती है!



