बुजुर्गों में बढ़ती उम्र में अपने बैलेंस में सुधार करने की होती है जरूरत.

जो लोग वर्कआउट के शौकीन होते हैं उन्हें हर उम्र में एक्सरसाइज करना पसंद होता है, लेकिन मुश्किल ये है कि एक उम्र के बाद शरीर हर तरह की एक्सरसाइज करने की छूट नहीं देता. ओल्ड एज में बॉडी की मजबूती के साथ साथ बैलेंसिंग पर भी असर पड़ता है. ऐसे में गिरने का और चोट लगने का डर बढ़ जाता है, लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि बुजुर्गों को वर्कआउट छोड़ देना चाहिए. वर्कआउट छोड़ने की बजाय ऐसे वर्कआउट तलाशे जाने चाहिए जिनसे बॉडी बैलेंसिंग भी परफेक्ट हो और गिरने या चोट का खतरा भी न हो.
बुजुर्गों के लिए परफेक्ट हैं ये व्यायाम
1) सीटेड लेग रेज
- ये एक ऐसी एक्सरसाइज है जो कुर्सी पर बैठकर की जाती है और एब्स को मजबूत करती है.
- आप कुर्सी पर बैठ जाएं और दोनों पैरों को जमीन से ऊपर उठा लें.
- कम से कम पांच सेकंड इसी पोजीशन में रहें. एक स्ट्रेच में इसे एक्सरसाइज को दस बार करें.
- डिफिकल्टी लेवल बढ़ाना हो तो आर्म रेस्ट पर हाथ भी न रखें.
2) लंजेस
- लंज वर्कआउट ठीक वैसे ही करना है जैसा हमेशा करते आ रहे हैं.
- दोनों पैरों को एक ही जगह रख कर खड़े हो जाएं. फिर एक पैर पीछे ले जाएं.
- घुटने मोड़ते हुए थोड़ा झुकें.
- अपनी अपर बॉडी को एकदम सीधा रखें.
- बस ये ध्यान रखें कि आप किसी दीवार का सहारा लेकर ये वर्कआउट करें.

3) वन लेग बैलेंस
- दोनों पैरों को थोड़ा सा फैलाकर खड़े हो जाएं. अब घुटना मोड़ते हुए एक पैर को ऊपर लाएं.
- जो पैर जमीन पर है, कोशिश करें आपके पूरे शरीर का भार उस पर हो और खुद को बैलेंस भी करें.
- अगर ऐसा लगता है कि बैलेंस बिगड़ सकता है.
- गिरने का डर है तो सामने की तरफ कुर्सी रखें. उसे पकड़ कर ये वर्कआउट करें.
4) रोटेट लेग क्लॉक वाइज
- मान लें आप जहां खड़े हैं वो एक घड़ी का सेंटर प्वाइंट है.
- अब आपको 12 बजने वाली पोजीशन में पैर रखने हैं.
- इसके बाद दो बजे, चार बजे और फिर बारह बजे वाली पोजीशन लेनी है.
- एक के बाद एक दोनों पैरों से ऐसा करते जाएं.
5) ट्री कटिंग एक्शन
- आपके हाथ में कुल्हाड़ी तो आप पेड़ कैसे काटेंगे.
- दोनों हाथों को जोड़ कर ऊपर की तरफ ले जाएं. और फिर उन्हें कमर के एक तरफ ले जाएं.
- अगर कंफर्टेबल हों तो दोनों हाथों में डंबल या बोतल पकड़ सकते हैं.



