पानी रोकने से नहीं होगा,आतंकवाद पर कारगर प्रहार जरूरी : झामुमो

झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के वरिष्ठ नेता सुप्रियो भट्टाचार्य ने सोमवार को पार्टी के कैंप कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि इस अमानवीय हमले ने देश की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और केंद्र सरकार को इस पर कठोर निर्णय लेने की जरूरत है।
भट्टाचार्य ने दो टूक शब्दों में कहा आतंकवादियों को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए भारत सरकार जो भी कड़ा कदम उठाएगी, झामुमो उसके साथ खड़ा है। पूरा देश सरकार के साथ है। अब पानी रोकने से कुछ नहीं होगा, आतंकवाद को काउन्होंने कहा कि आतंक और आतंकी के कोई धर्म और जाति नहीं होते हैं, लेकिन इस तरह की आतंकी घटना को अब हम संयोग और प्रयोग दोनों दृष्टि से देखते हैं। उन्होंने कहा कि जब-जब देश में संवेदनशील मुद्दे खड़े होते हैं, विदेशी गणमान्य मेहमान आते हैं, तभी आखिर इस तरह की घटनाएं क्यों हो जाती हैं। यह सवाल उठता है।रगर ढंग से रोकना होगा
उन्होंने कहा कि हमलोगों ने पुलवामा में देखा, कई चलती बसों में सैनिकों से भरी नॉन बुलेट प्रुफ बस पर ही आतंकी हमला हुआ। पहलगाम में उस वक्त हमला हुआ, जब देश में कई संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा हो रही है। इस घटना के बाद पीएम मोदी का बिहार आकर चुनावी सभा भी महज एक संयोग है। जम्मू-कश्मीर में पर्यटन के व्यस्त समय में सुरक्षा बलों की अनुपस्थिति में हमला कई सवाल खड़े करता है। वह भी तब, जब दस दिन पहले ही गृह मंत्री वहां की सुरक्षा का जायजा लेकर आए हैं। तीन मई से वहां अमरनाथ का बेस कैंप बनेगा और उसी कश्मीर में इस प्रकार का अटैक होना सुरक्षा इंतजाम को नए सिरे से समीक्षा करने का संकेत भी है। गृह मंत्री को पहलगाम आतंकी हमला की जिम्मेदारी लेनी होगी। सुरक्षा समीक्षा के बाद ऐसा हमला सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक को दर्शाता है।
आतिथ्य में कोई हिंदू-मुसलमान की बात नहीं
सुप्रियो ने कहा कि कश्मीर का आतिथ्य जो कश्मीर नहीं गए हैं, वह नहीं समझ पाएंगे। आतिथ्य में कोई हिंदू-मुसलमान की बात नहीं है। अमरनाथ की यात्रा, चाहे वह पिट्ठू पर हो या खच्चर पर, उन्हें ले जाने वाले मुसलमान होते हैं। डल झील का हर शिकारा मुसलमान होता है और उसमें हिंदू बैठता है। हिन्दुस्तान की एकता को कोई तोड़ नहीं सकता है। 1971 में पड़ोसी देश को सबक सिखाया गया, अब फिर से सबक सिखाने की जरूरत है। पुलवामा की तरह पहलगाम में भी कोई न कोई गद्दार होगा। उस गद्दार को देश के सामने लाना होगा।



