मिडिल ईस्ट हालात पर साढ़े तीन घंटे चली PM मोदी की हाईलेवल मीटिंग, तेल-गैस जैसे ऊर्जा आपूर्ति पर मंथन

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध की बीच प्रधानमंत्री मोदी एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक करीब साढ़े तीन घंटे तक चली। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा संकट से निपटना और भारत में तेल, गैस और उर्वरक की सप्लाई आपूर्ति सुनिश्चित करना है। इस बैठक में अमित शाह राजनाथ समेत पेट्रोलियम मंत्री भी शामिल रहे। सूत्रों के मुताबिक, मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारी भी इस बैठक में शामिल हुए।
बैठक में प्रधानमंत्री ने वरिष्ठ मंत्रियों और अधिकारियों के साथ कच्चे तेल, गैस और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की स्थिति की समीक्षा हुई। साथ ही बिजली और उर्वरक सेक्टर की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। बैठक का मुख्य फोकस निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने, स्थिर लॉजिस्टिक्स सुनिश्चित करने और पूरे देश में वितरण प्रणालियों को सुव्यवस्थित करने पर था, ताकि आवश्यक सेवाओं में किसी भी तरह की रुकावट को रोका जा सके। इस दौरान अधिकारियों ने प्रधानमंत्री को ईंधन की उपलब्धता की वर्तमान स्थिति और भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे कदमों के बारे में जानकारी दी।
कौन-कौन बैठक में शामिल?
इस अहम बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, विदेश मंत्री एस जयशंकर और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी समेत कई बड़े नेता शामिल हुए। इसके अलावा सूत्रों के मुताबिक राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे, जिन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों की स्थिति पर जानकारी दी।
संकट को लेकर सरकार सतर्क
सूत्रों के अनुसार, सरकार वैश्विक घटनाक्रम पर करीबी नजर रख रही है और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उतार-चढ़ाव से उपभोक्ताओं और उद्योगों को प्रभावित न होने देने के लिए सक्रिय कदम उठा रही है। बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच पर्याप्त भंडार बनाए रखने और आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं। यह क्षेत्र तेल और गैस आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
मुख्य समुद्री मार्गों, विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित व्यवधान को लेकर भी चिंता जताई गई है, जो वैश्विक ऊर्जा व्यापार का बड़ा हिस्सा संभालता है। एक दिन पहले प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से बातचीत की थी और क्षेत्रीय स्थिति पर चर्चा करते हुए शांति और स्थिरता की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों को खुला और सुरक्षित रखने के महत्व को भी रेखांकित किया और चेतावनी दी कि किसी भी तरह का व्यवधान वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं को प्रभावित कर सकता है।
सरकार ने साफ किया है कि वह ऊर्जा सप्लाई को स्थिर रखने के लिए लगातार कदम उठा रही है। लॉजिस्टिक्स को मजबूत किया जा रहा है और वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाया जा रहा है। साथ ही कालाबाजारी रोकने और जरूरी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भी निगरानी बढ़ा दी गई है।



