क्या ब्लैक फंगस ओमिक्रॉन लहर में फिर वापसी करेगा? जानें विशेषज्ञ क्या कहते हैं…

जैसे-जैसे पूरे भारत में ओमिक्रॉन के मामले बढ़ते जा रहे हैं, वैसे-वैसे म्यूकोर्मिकोसिस या ब्लैक फंगस की वापसी से कई लोगों को डर लगने लगा है। पिछले साल, दूसरी लहर के दौरान, Mucormycete नामक फंगस के चलते कई लोगों की जान चली गई थी। दूसरी लहर के दौरान देखा गया था कि कोरोना वायरस से उबरने वाले लोगों में ब्लैक फंगस पाया गया था जिसके कारण कई रोगियों की मौतें हुईं।
किसे है ब्लैक फंगस का जोखिम?
म्यूकोर्मिकोसिस या ब्लैक फंगस पीड़ितों में अंधापन, अंग की शिथिलता, शरीर के ऊतकों की हानि और यहां तक कि समय पर इलाज न करने पर मृत्यु का कारण बन सकता है। यह शरीर के उन जगहों को प्रभावित कर सकता है जहां से हम सांस लेते हैं, जैसे- नाक, साइनस या फेफड़े। हाई ब्लड शुगर लेवल वाले और लंबे समय तक स्टेरॉयड पर रहने वाले कोविड रोगियों को ब्लैक फंगस से खतरे का ज्यादा जोखिम होता है। इसके अलावा, कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले रोगियों या जिनका किसी अंगर का प्रत्यारोपण हुआ है या जो लोग लंबे समय तक इम्यूनोसप्रेसेन्ट या वेंटिलेटर पर हैं, वे अधिक जोखिम में हैं।

क्या हैं ब्लैक फंगस के लक्षण?
आंखों में सूजन, आंखें लाल होना, आंखें खोलने व बंद करने में परेशानी, डबल विजन, दिखाई कम या नहीं दिखना, नाक बंद होना व नाक से बदबूदार पानी / खून आना, चेहरे पर सूजन/सिर दर्द/सुन्नपन होना, दांतों में दर्द, चबाने में परेशानी, उल्टी व खांसने में खून आना, बुखार, खांसी, साँस लेने में तकलीफ, खून की उल्टी आदि ब्लैक फंगस के लक्षण हैं। मुंबई ने हाल ही में म्यूकोर्मिकोसिस का अपना पहला मामला दर्ज किया, जहां 5 जनवरी को कोरोना पॉजिटिव पाए गए एक 70 वर्षीय कोविड रोगी ने 12 जनवरी को ब्लैक फंगस के लक्षण दिखाना शुरू किया। इसके बाद, उसे मुंबई सेंट्रल के वॉकहार्ट अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वर्तमान में उसका इलाज चल रहा है। ।

मुंबई में मिला पहला मामला
मुंबई सेंट्रल के वॉकहार्ट अस्पताल की इंटरनल मेडिसिन डॉक्टर हनी सावला ने कहा, “रोगी को कमजोरी की शिकायत के साथ 12 जनवरी को अस्पताल में भर्ती कराया गया था और भर्ती के दौरान शुगर लेवल 532 तक चला गया था। उसे तुरंत डायबिटीज केटोएसिडोसिस उपचार के लिए रखा गया था। परिवार ने कहा कि मरीज पिछले 10 दिनों से डायबिटीज की दवा नहीं ले रहा था। तीसरे दिन रोगी ने गाल में दर्द की शिकायत की और चेहरे के बाईं ओर सूजन आ गई जिससे हमें म्यूकोर्मिकोसिस के बारे में संदेह हुआ। आगे की जांच में यह फंगल होने के बारे में पता चला। रोगी की सर्जरी हुई और टिश्यू को जांच के लिए भेजा गया। रोगी अभी स्थिर है और वर्तमान में एंटी-फंगल निगरानी पर है। भविष्य में भी उनकी कई जांच सर्जरी होंगी।”

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क्या ओमिक्रॉन लहर में फिर वापसी करेगा ब्लैक फंगस? जानिए विशेषज्ञ क्या कहते हैं
क्या ओमिक्रॉन लहर में फिर वापसी करेगा ब्लैक फंगस? जानिए विशेषज्ञ क्या कहते हैं
Parmita Uniyal,मुंबई
Amit Kumar
Mon, 24 Jan 2022 07:39 PM
क्या ओमिक्रॉन लहर में फिर वापसी करेगा ब्लैक फंगस? जानिए विशेषज्ञ क्या कहते हैं
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जैसे-जैसे पूरे भारत में ओमिक्रॉन के मामले बढ़ते जा रहे हैं, वैसे-वैसे म्यूकोर्मिकोसिस या ब्लैक फंगस की वापसी से कई लोगों को डर लगने लगा है। पिछले साल, दूसरी लहर के दौरान, Mucormycete नामक फंगस के चलते कई लोगों की जान चली गई थी। दूसरी लहर के दौरान देखा गया था कि कोरोना वायरस से उबरने वाले लोगों में ब्लैक फंगस पाया गया था जिसके कारण कई रोगियों की मौतें हुईं।

किसे है ब्लैक फंगस का जोखिम?
म्यूकोर्मिकोसिस या ब्लैक फंगस पीड़ितों में अंधापन, अंग की शिथिलता, शरीर के ऊतकों की हानि और यहां तक कि समय पर इलाज न करने पर मृत्यु का कारण बन सकता है। यह शरीर के उन जगहों को प्रभावित कर सकता है जहां से हम सांस लेते हैं, जैसे- नाक, साइनस या फेफड़े। हाई ब्लड शुगर लेवल वाले और लंबे समय तक स्टेरॉयड पर रहने वाले कोविड रोगियों को ब्लैक फंगस से खतरे का ज्यादा जोखिम होता है। इसके अलावा, कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले रोगियों या जिनका किसी अंगर का प्रत्यारोपण हुआ है या जो लोग लंबे समय तक इम्यूनोसप्रेसेन्ट या वेंटिलेटर पर हैं, वे अधिक जोखिम में हैं।

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क्या हैं ब्लैक फंगस के लक्षण?
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मुंबई में मिला पहला मामला
मुंबई सेंट्रल के वॉकहार्ट अस्पताल की इंटरनल मेडिसिन डॉक्टर हनी सावला ने कहा, “रोगी को कमजोरी की शिकायत के साथ 12 जनवरी को अस्पताल में भर्ती कराया गया था और भर्ती के दौरान शुगर लेवल 532 तक चला गया था। उसे तुरंत डायबिटीज केटोएसिडोसिस उपचार के लिए रखा गया था। परिवार ने कहा कि मरीज पिछले 10 दिनों से डायबिटीज की दवा नहीं ले रहा था। तीसरे दिन रोगी ने गाल में दर्द की शिकायत की और चेहरे के बाईं ओर सूजन आ गई जिससे हमें म्यूकोर्मिकोसिस के बारे में संदेह हुआ। आगे की जांच में यह फंगल होने के बारे में पता चला। रोगी की सर्जरी हुई और टिश्यू को जांच के लिए भेजा गया। रोगी अभी स्थिर है और वर्तमान में एंटी-फंगल निगरानी पर है। भविष्य में भी उनकी कई जांच सर्जरी होंगी।”

क्या वापसी करेगा ब्लैक फंगस?
ब्लैक फंगस के मामले वर्तमान में व्यापक रूप से रिपोर्ट नहीं किए जा रहे हैं, लेकिन इसको लेकर हमने विशेषज्ञों से पूछा कि क्या इस घातक पोस्ट-कोविड बीमारी की वापसी हो सकती है और क्या इसके पिछले साल की तरह कहर बरपाने ​​​​की संभावना है? इस पर मसीना अस्पताल, मुंबई की संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ तृप्ति गिलाडा कहती हैं “हम दूसरी लहर से जानते हैं कि म्यूकोर्मिकोसिस के जोखिम कारक लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती वाले मरीजों में ज्यादा हैं, इसके अलावा मध्यम से गंभीर कोविड वाले लोगों में लंबे समय तक कॉर्टिकोस्टेरॉइड की आवश्यकता के चलते व हल्के कोविड वाले रोगियों में स्टेरॉयड के अंधाधुंध इस्तेमाल के चलते ये खतरा और भी बढ़ जाता है। हालांकि यह जानना अभी भी जल्दबाजी होगी कि क्या हम तीसरी लहर में भी बड़ी संख्या में ब्लैक फंगस रोगियों को देखेंगे, हम उम्मीद करते हैं कि यह बहुत कम हो क्योंकि उपरोक्त सभी जोखिम कारक ओमिक्रॉन के साथ बहुत कम हैं। मधुमेह वाले लोगों में स्टेरॉयड, एंटीबायोटिक्स और अच्छे शुगर कंट्रोल का जिम्मेदार उपयोग महत्वपूर्ण होने जा रहा है।”

अमेरी स्वास्थ्य, एशियाई अस्पताल, फरीदाबाद की सलाहकार चिकित्सक और संक्रामक रोग विशेषज्ञ प्रमुख डॉ चारु दत्त अरोड़ा ने कहा, “नहीं, ओमिक्रॉन से पीड़ित रोगियों में म्यूकोर्मिकोसिस के मामलों में कोई वृद्धि नहीं हुई है। चूंकि अधिकांश रोगियों में हल्के से मध्यम लक्षण होते हैं और उनके उपचार के दौरान स्टेरॉयड या ज्यादा ऑक्सीजन समर्थन जैसे इम्युनोमोड्यूलेटर की आवश्यकता नहीं होती है, इसलिए इस तरह की बीमारी के चांसेस कम हैं।”

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