किसानों की हालत सुधारने के लिए कोई वादा पूरा नहीं किया सरकार नेः सुरजेवाला

नयी दिल्ली। कांग्रेस ने गुरूवार को राज्यसभा में आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने किसानों की हालत सुधारने के लिए अब तक जो भी वादे किये वे केवल जुमले साबित हुए और किसानों की आय दोगुना करने से लेकर न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल की खरीद करने जैसे एक भी वादे को पूरा नहीं किया गया है।
कांग्रेस के रणदीप सुरजेवाला ने सदन में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा की शुरूआत करते हुए कहा कि मोदी सरकार के किसान कल्याण क्रियाकलापों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सरकार ने पांच वर्षों में कृषि मंत्रालय के बजट का एक लाख करोड़ रूपया वापस लौटाया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने वादा किया था कि वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी कर दी जायेगी लेकिन मंत्रालय की स्थायी समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि किसानों की आय दोगुना तो नहीं की जा
सकी बल्कि यह कुछ राज्यों में पहले से भी कम हो गयी है। उन्होंने कहा कि सरकार बजट में कृषि के आवंटन को चार प्रतिशत से कम कर कुल बजट के केवल 2.74 प्रतिशत पर ले आयी है। उन्होंने सरकार की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि देश में सवा लाख से अधिक किसानों ने आत्महत्या की है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि यह निजी बीमा कंपनियों के लिए मुनाफे का सौदा बन गयी है।
श्री सुरजेवाला ने कहा कि सरकार ने तीन विवादास्पद कृषि कानूनों को वापस लेने के समय एमएसपी लागू करने का वादा किया था लेकिन अब तक यह पूरा नहीं हुआ है। उन्होंने कृषि मंत्री द्वारा दिये गये आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि सरकार खुद उसके द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर ही फसलों की खरीद नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने गेंहूं, चना, जौ और सरसों के कुल उत्पादन में से बहुत कम फसल को एमएसपी पर खरीदा है। उन्होंने कहा कि फिर एमएसपी का क्या औचित्य रह जाता है। किसानों के लिए शुरू की गयी प्रधानमंत्री कुसुम योजना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने इसके तहत जो घोषणाएं की थी वे धरातल पर नहीं उतरी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने उर्वरक पर सब्सिडी में भी कटौती की है।
भारतीय जनता पार्टी के सुरेन्द्र सिंह नागर ने कहा कि देश में आजादी के बाद आधे खाद्यान्न का आयात किया जाता था, लेकिन किसानों ने कड़ी मेहनत कर खाद्यान्न के मामले में देश को आत्मनिर्भर बनाया। उसी का परिणाम है कि आज मोदी सरकार देश के 80 करोड़ लोगों को निःशुल्क खाद्यान्न दे पा रही है। वर्ष 2014-15 में 21933 करोड़ रुपये का कृषि बजट था, जो वर्ष 2023-24 में बढ़कर 1.52 लाख करोड़ करने का हो गया है। यह किसानों के प्रति सम्मान की बात है। संप्रग सरकार ने तीन बार की सिफारिशों के बावजूद स्वामीनाथन समिति की रिपोर्ट को लागू नहीं किया। इस देश के किसान सौभाग्यशाली है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने स्वामीनाथन समिति की रिपोर्ट को लंबे समय के बाद लागू करने का काम किया। इस देश में किसान नेताओं को सम्मान नहीं दिया गया। किसान नेता और स्वामीनाथन जी को भारत रत्न देने का काम मोदी सरकार ने किया।



