कौन हैं जो कह रहे की शराबबंदी करोगे तो वोट नहीं देंगे ..यह तो असंगत है..

नशे की नसबंदी -4/धार -एक बेबाक अभियान ( विसंगतियों के खिलाफ शंखनाद ,17 वर्षों से मानवीय मूल्यों को सहेजने लगातार जारी स्तंभ )/नवीन श्रीवास्तव,लेखक एवं पत्रकार)
आपने पढ़ा – जितना भी नशे की चीजें है ..वह प्रेम के खिलाफ है क्योंकि हम होश में रहेंगें नहीं तो प्रेम में खोने बचेगा क्या ..
..जनसहयोग से अपेक्षा के पहले क्यों ना राजनीतिक पार्टियां यह घोषणा करें ..संकल्प करें कि – पार्टी से जुड़ा कोई भी व्यक्ति पुरूष /स्त्री.. किसी तरह के शराब या किसी भी तरह के नशे को नहीं करेंगे( कोई नहीं करता तो अच्छा है )इस व्यसन से दूर रहेंगे.
अब आगे पढ़ें* :-आचरण से किसी को सीख देना आसान नहीं है इसके लिए चारित्रिक दृढ़ता चाहिए..छत्तीसगढ़ में नशाबन्दी के लिए यह जरूरी है..
शराबबंदी को लेकर दो अलग अलग राय को लेकर रखते हुए स्वास्थ्यमंत्री महोदय बातें सुर्खियों में रहा है जिसमें उन्होंने कहा है कि-
– लोगों ने मुझसे कहा कि शराबबंदी करोगे तो सरकार को वोट नहीं देंगे…
– फिर माननीय स्वास्थ्य मंत्री कहते हैं कि घरेलू हिंसा सामाजिक ताने-बाने में पीस रहे महिलाएं चाहती है कि शराबबंदी हो जाए
अगर आप से पूछा जाए इन दोनों में से उचित राय कौन सा होगा या होना चाहिये तो ..आप पहले वाली राय को खारिज कर देंगे होना भी यही चाहिये …नशाबन्दी के लिए गम्भीर भूपेश सरकार भी संभव पहले राय को खारिज कर दे अब स्वास्थ्य मंत्री इसे लेकर कितना गंभीर है यह वही बेहतर जानते होंगे.. बहरहाल नशेबन्दी को लेकर इस तरह की राय को स्वीकार भी नहीं किया जा सकता ..यह कहना कि वह भी एक प्रदेश की व्यवस्था चलाने वाली सरकार को लेकर की आप शराबबन्दी करोगे तो वोट नहीं देंगे बिलकुल असंगत है ..इसका विरोध भी होना चाहिये ..खासकर जब यह किसी स्वास्थ्यमंत्री से कहा जाए या स्वास्थ्य मंत्री के कानों में पड़े कोई ऐसा कहता है कि …शराबबंदी करेंगें तो वोट नहीं देंगे तो तुरंत क्या स्वास्थ्य मंत्री द्वारा इसका विरोध नहीं होना चाहिए ..बिलकुल होना चाहिए .. *क्या नशाबन्दी कोई बुराई है या यह व्यवस्था केवल आपके लिये है या आप कोई तोप है जो आप कहें तो शराब की दुकान खुली रहे …और जब तक आप ना कहें इसकी दुकान बंद ना हो सके* …फिर सरकार कैसे अधिसंख्य जनता की हितों को देखेगी..नहीं यह कहना बिलकुल भी सही नहीं कि मैं अगर शराब पीता हूं तो तो नशाबन्दी करने की सोच रही अपनी सरकार से यह कहूं कि — नहीं आप शराबबंदी करोगे तो मैं आपको वोट नहीं दूंगा..यह मेरे ख्याल से,विवेक से अनुचित है..यह कहना एक तरह चमकाना नहीं है क्या.. फिर सरकार इनके समर्थन में कैसे खडी रह सकती ..जबकि *समाज के लिए,भविष्य के लिए,स्त्री जाति के लिए,बच्चों के लिए,प्रेम के लिए,शांति के लिए नशे के खिलाफ खड़ा होना ही चाहिये चाहे आम जनता हो,कोई अमीर जादा हो या नेता हो चेता*
सभ्यता यही है और *हर नागरिक का कर्तव्य कि कोई सरकार अगर नशे की बुराइयों के खिलाफ किसी भी स्तर पर कुछ कर गुजरना चाहे तो भले कोई नशा करता हो या पियक्कड़ हो..तो उसे क्या यह नहीं कहना चाहिये की – नशाबन्दी अच्छी बात है..मैं भी कोशिश करूंगा /करूंगी या फिर जितना हो सके कम करूंगा या जितना हो सके इससे बचने की कोशिश करूंगा* ..मैं आपके साथ हूं यह नहीं की कोई कहे शराबबंदी होगा तो वोट नहीं देंगे ..यह नशाबन्दी करने के सभी अभियान,प्रयास के में लगी सरकार मानवीय विकास प्रयासों के खिलाफ है…( हमारा देश सशक्त हो खुशहाल हो – जारी..)



