शाकिर अंसारी को उच्च न्यायालय ने दोषमुक्त किया गया

बिलासपुर :- माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा निपुन सक्सेना वगै,वि यूनियन ऑफ इंडिया वगै (2019) 8 ए, सी ,सी 371 में 1से 57 अंकों में दिए दिशा निर्देश के पालन में पीड़िता की पहचान की गोपनीयता बनाए रखने हेतु पीड़िता के माता-पिता नाना मामा को संपूर्ण निर्णय में अभियोक्त्री/पीड़िता पीड़िता के माता पिता नाना मामा तथा घटनास्थल को प्रथम सूचना रिपोर्ट में उल्लेखित घटनास्थल से संबोधित किया जा रहा है (02) अभियुक्त शाकिर अंसारी बाबा उर्फ हब्बू अंसारी के विरुद्ध धारा – 376(2) (एन) 506 भा.दं.स.एंव धारा-5 (एल)/ 6 पांक्सो अधि.के अंतर्गत यह आरोप है कि उसने पर जितने दिनांक 11-07-19 से 27-08 2020 के मध्य प्रथम सूचना रिपोर्ट में उल्लेखित घटनास्थल आरक्षी केंद्र सीपत जिला बिलासपुर में निवासरत आवश्यक अभियोक्त्री/ पीड़िता उम्र 16 वर्ष 05 माह 7 के साथ बार-बार बलात्संग कारित किया,उसे संत्रास करित करने के आशय से जान जान से एवं पागल करने की धमकी देकर अपराधिक अभित्रास कारित किया एवं आवश्यक अभियोक्त्री/ पीड़िता के साथ एक से अधिक बार या बलात्संग कारित कर गुरूत्तर प्रवेशन लैंगिक हमला किया, (03)अभियोजन प्रकरण का सार यह है कि आवश्यक प्रार्थिया/ पीड़िता उम्र 16 वर्ष 5 माह 7 दिन आरक्षी केंद्र मुंगेली जिला बिलासपुर में अपने परिवार सहित निवास करती है दिनांक 08-05-19 को आवश्यक अभियोक्त्री /पीड़िता की तबीयत लगातार खराब होने के कारण उन्हें झाड़-फूंक से इलाज हेतु कराने के लिए बलौदा स्थित सैयद मीरा अली दातार मजार बलौदा जिला जांजगीर चांपा गई थी जहां अभियुक्त शाकिर अंसारी बाबा उर्फ अब्बू मौलवी 1 सप्ताह रुकने के पश्चात व्यक्तिगत झाड़-फूंक करने पर जल्दी और स्थाई रूप से पूर्ण ठीक होने अथवा नहीं तो पागल होने का भय दिखाते हुए रूकने को कहा गया था ऐसा आरोप अभियुक्त शाकिर अंसारी बाबा उर्फ हब्बू अंसारी के उपर लगाया गया रहा जंहा पीड़िता के आरोपों से उच्च न्यायालय ने दोषमुक्त कर स्वतंत्र किया जाता है (54) इस प्रकरण में पीड़िता ने अभियुक्त के द्वारा उसके साथ अपराध नहीं करने का कथन करते हुए अभियोजन का समर्थन नहीं की है एवं अभियुक्त को दोषमुक्त किया गया है इसलिए उचित नहीं होने के कारण पीड़िता को क्षतिपूर्ति नहीं दिलाई जा रही है (55) जप्त दस्तावेज प्रकरण में संलग्न किए जाएं वहीं जब स्लाइड व कपड़े अपील अवधि पश्चात नष्ट अपील किए जाने पर जप्त संपत्तियों का निराकरण माननीय उच्च न्यायालय के आदेश अनुसार किया जावे अभियुक्त द्वारा अभिरक्षा में वितरित की गई अवधी हेतु धारा 428 द.प्र.स. के अंतर्गत निरोध अवधि तालिका बनाई जाएं

पीड़िता का घटना के समय एक अवयस्क बालिका होना प्रमाणित है
अतः घटना के संबंध में उसकी सहमति या असहमति महत्वहीन है और ना ही इसका लाभ अभियुक्त को दिया जा सकता है किंतु इसके लिए उसके द्वारा अभियोजन का समर्थन करना और विश्वसनीय होना अनिवार्य है वहीं इस तरह उच्चतम न्यायालय छत्तीसगढ़ राज्य के निर्णय से शाकिर अंसारी उर्फ हब्बू अंसारी को दोषमुक्त बरी किया गया है वहीं पीड़िता के परिवार ने जानबूझ कर शाकिर अंसारी मौलवी के खिलाफ 376 का केस दर्ज कर बदनाम किया गया.

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