उमा भारती के बयान से BJP को कितनी होगी मुश्किल

मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी की वरिष्ठ नेता उमा भारती ने लोधी समुदाय से कहा है कि वे अपनी मर्जी से किसी भी पार्टी को वोट देने के लिए स्वतंत्र हैं। भारती खुद लोधी समुदाय से ही ताल्लुक रखती हैं, जो ओबीसी कैटेगरी में आता है। उमा भारती के इस संदेश के कई मायने निकाले जा रहे हैं क्योंकि परंपरागत रूप से लोधी समुदाय बीजेपी का ही वोट बैंक रहा है लेकिन भारती के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद इस वोट बैंक में बिखराव हुआ है।
लोधी समाज का 9 फीसदी वोट बैंक:
राज्य में लोधी समुदाय का करीब नौ फीसदी वोट बैंक है। इसके अलावा 230 सदस्यों वाली विधानसभा में करीब 65 सीटें ऐसी हैं, जहां लोधी समुदाय हार-जीत तय करता है। ऐसी अधिकांश सीटें बुंदेलखंड और आसपास के इलाके में आती हैं। बुंदेलखंड के बाद ग्वालियर और चंबल इलाके में भी लोधी समुदाय सियासी हार-जीत तय करने में सशक्त है।
13 लोकसभा सीटों पर लोधी वोट निर्णायक:
राज्य की 29 लोकसभा सीटों में से 13 लोकसभा सीटों पर भी लोधी वोट निर्णायक हैं। उन सीटों में बालाघाट, खजुराहो, दमोह, सागर, विदिशा और होशंगाबाद प्रमुख हैं। उमा भारती और सीएम शिवराज सिंह चौहान के बीच रिश्ते भी बहुत अच्छे नहीं रहे हैं।
बीजेपी से छिटकता नजर आ रहा लोधी समुदाय:
जब से उमा भारती बीजेपी में हाशिए पर गई हैं, तब से लोधी समुदाय भी बीजेपी से छिटकता नजर आ रहा है। इसका असर 2018 के विधानसभा चुनावों में भी देखने को मिल चुका है। बुंदेलखंड क्षेत्र की 26 सीटों में से 14 पर बीजेपी, जबकि 10 पर कांग्रेस की जीत हुई थी। इसी तरह सागर क्षेत्र की 26 सीटों में से 14 पर बीजेपी और 10 पर कांग्रेस की जीत हुई थी। मालवा क्षेत्र में भी कुल 50 सीटों में से बीजेपी को 24 जबकि कांग्रेस को 26 सीटों पर जीत मिली थी।
हाल के दिनों की घटनाएं:
हाल के दिनों में जब से बीजेपी ने प्रीतम लोधी को पार्टी से निकाला है, तब से लोधी समाज के नेता कहते रहे हैं कि बीजेपी को 2023 के विधानसभा चुनावों में सबक सिखाएंगे और 65 सीटों पर हार का स्वाद चखाएंगे। ये अलग बात है कि उनकी बात कहां तक सच होती है लेकिन यह भी सच है कि बीजेपी भले ही ओबीसी मतदाताओं को लुभाने का कोई दांव नहीं छोड़ रही हो लेकिन शिवराज सिंह चौहान की 15 साल पुरानी सरकार के खिलाफ एंटी इनकमबेंसी फैक्टर भी हावी है।
ऐसे में उमा भारती की यह अपील की लोधी समाज अपनी मर्जी से वोट करे तो बीजेपी के लिए बहुत मुश्किल हो सकती है। 2018 के चुनावों में बीजेपी को कुल 41.02 फीसदी वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस को 40.89 फीसदी वोट मिले थे। अगर लोधी समुदाय को 9 फीसदी वोट बैंक बीजेपी से छिटक जाता है तो यह अंदाजा लगाना कठिन नहीं होगा कि बीजेपी के लिए 2023 की डगर कठिन है मुश्किल?



