बस्तर संभाग के साहित्यकारों ने मनाया दीपावली मिलन समारोह

जगदलपुर/नवीन श्रीवास्तव

बस्तर की इस उर्वर धरती के सतत उत्साही साहित्यकार मात्र रचना ही नहीं लिखते हैं बल्कि जीवन्त भी हैं। लगातार होने वाली साहित्यिक गतिविधियों से जाना जा सकता है कि लाला जगदलपुरी जी की परम्परा को जीवित रखा गया है।

बोनसाई और पौधों की विराट प्रजातियों को अपने घर की छत पर बच्चों की तरह पालने वाली श्रीमती ज्योति चौहान के धरमपुरा स्थित घर पर आयोजित दीपावली मिलन समारोह अद्भुत रहा। जन जन के प्रिय पद्मश्री धर्मपाल सेनी जी की उपस्थिति में शहर नामचीन साहित्यकारों डॉ कौशलेन्द्र मिश्र, विपिन बिहारी दाश, अवध किशोर शर्मा, अनिता राज, शरदचंद्र गौड़, डॉ सुषमा झा, सनत जैन आदि ने अपनी रचनाओं का पाठ कर दीपावली मिलन मनाया।

युवा गजलकार कृष्णशरण पटेल ने अपनी गजल से गहरी बात कही-

ये हसरतों की दुनिया और सामने है गुमनाम सी जिन्दगी।

कुछ के लिये शानदार तो कुछ के लिये है आम जिन्दगी।

ओमप्रकाश ध्रुव ने मां पर अपनी कविता सुनाकर सभा को मोहित कर दिया।

मैं निःशब्द हूं मां! तेरे लिये मैं क्या कहूं….

बस इतना ही कहना चाहूंगा…..

तू जीवन का सार है, तू जीने का आधार है,

मेरा कुछ भी नहीं, तुझसे ही मेरा संसार है।

ममता मधु ने दीपावली पर अपनी कविता पढ़ी-

आप जब मिलते हैं, तब खुशी के दीये जलते हैं

अपने जब मिलते हैं, तब खुशी के दीये जलते हैं।

युवा व्यवसायी और रचनाकार मनोज उपाध्याय ने अपनी प्रेम कविताओं की प्रस्तुति में खूब तालियां बटोरी। उनकी कविता के बोल थे-सबकुछ छूट जायेगा तो, फिर प्यार कहां रहेगा।

भानपुरी से कार्यक्रम में शामिल होने आयीं अलका पाण्डे ने अपनी मुस्कुराहट कविता से सबके चेहरे में मुस्कुराहट ला दी। बंधन से परे होती है मुस्कान /उन्मुक्त होती है हँसी/हवा का कोई देश नहीं / खुशबू की कोई सीमा नहीं /भावनाओं की परिधि नहीं /जज्बात का कोई नाम नहीं /धड़कन की कोई भाषा नहीं /होती है सिर्फ अभिव्यक्ति, /जिसने भावभंगिमाओं को पढ़ा /जिसने गहरे अंतस के भावों में /गोता लगाया, केवल वही समझा /वही जाना, वही पहचाना।

देशभर में अपनी उपस्थिति जताने वाली अंजली तिवारी ने अपनी व्यंग्य रचना से खूब हंसाया- भगवान तेरे जहान में / ये क्या हो रहा है। /दुनिया कितनी बदल रही है / गाय की जगह कुत्ते पाल खुश हो रहे हैं।

साहित्यिक गोष्ठी में प्रथम बार में ही अपनी उपस्थिति देते हुये गीता शुक्ला ने देशभक्ति की रचना का पाठ किया।-

शरीर की शिराओं में रक्त के कण कण में, / प्राण के श्वांस श्वांस में सिर्फ एक ही संकल्प हो, / देश भक्ति हो, देश भक्ति हो।

भगवान राम के जीवन पर आधारित अपनी कविता में राज कुमार जायसवाल ने राम और आम इंसानों में अंतर बताया साथ ही बताया कि हम खुशी मनाते हैं दीवाली मना कर और राम जी ने कितनी कठिनाइयों में जीवन जीया।-

हम मनाते दीवाली हमें याद हो / कंटकाकीर्ण था राम का रास्ता।

सतरूपा मिश्रा, कविता गौड़ ज्योति चौहान, केदारनाथ शर्मा, सूरज नारायण, नवीन श्रीवास्तव, सुकांति जायसवाल, किशोर मनवानी ने अपनी अपनी विशिष्ट कविताओं का पाठ किया।

इस कार्यक्रम की विशेषता थी जुगानी से अपने परिवार सहित पधारे युवा कवि स्वप्न बोस जी की पुस्तक मन के पार का लोकार्पण होना।मंच संचालन साहित्य एवं कला समाज के अध्यक्ष सनत सागर ने किया.

अंत में शिव प्रताप सिंह चौहान जी ने सभी साहित्यकारों का धन्यवाद ज्ञापित किया।

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