1984 में जो हुआ वह दंगा नहीं, नरसंहार था

मुंबई.अभिनेता-गायक दिलजीत दोसांझ की आगामी फिल्म ‘जोगी’ 1984 के सिख विरोधी दंगों पर आधारित है और उनका कहना है कि इस घटना को ‘‘नरसंहार’’ कहा जाना चाहिए. गौरतलब है कि 31 अक्टूबर, 1984 को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके सिख अंगरक्षकों ने हत्या कर दी थी. इस घटना के बाद से राष्ट्रीय राजधानी समेत देश के अन्य हिस्सों में हिंसा भड़क उठी थी. पूरे भारत में लगभग तीन हजÞार से अधिक सिख मारे गए थे, जिसमें सबसे ज्यादा हत्याएं दिल्ली में हुई थीं.

उसी वर्ष जनवरी में पैदा हुए दोसांझ ने एक साक्षात्कार में ‘‘पीटीआई-भाषा’’ से कहा, ‘‘हमें इसे दंगा नहीं कहना चाहिए, इसके लिए सटीक शब्द नरसंहार है. जब लोगों के बीच दो तरफा लड़ाई होती है, तो यह दंगा कहलाता है. मेरे हिसाब से इसे नरसंहार कहा जाना चाहिए.’’ अली अब्बास जÞफर के निर्देशन में बनी हिंदी फीचर फिल्म ‘जोगी’ इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राष्ट्रीय राजधानी में सिख समुदाय की पीड़ा को दर्शाएगी.

फिल्म में शीर्ष किरदार निभाने वाले दोसांझ का कहना है कि फिल्म 1984 में हुई वास्तविक जीवन की घटनाओं का ‘‘सामूहिक’’ चित्रण है. दोसांझ ने कहा, ‘‘ऐसा नहीं है कि यह एक या कुछ लोगों के साथ हुआ. मैं जानता हूं कि यह घटना सामूहिक रूप से हम सभी के साथ घटित हुई है. अगर मैं कुछ घटनाओं के बारे में बात करूं तो, यह व्यक्तिगत होगा. हम फिल्म में सामूहिक रूप से इसके बारे में बात कर रहे हैं. मैं जब पैदा हुआ था तभी से सुनता आया हूं और हम आज भी उन यादों के साथ रह रहे हैं.’’ फिल्म ‘जोगी’ 16 सितंबर (शुक्रवार) से ओटीटी मंच नेटफ्लिक्स पर प्रसारित होगी.

‘नेटफ्लिक्स’ एक ‘ओवर द टॉप’ (ओटीटी) मंच है, जो इंटरनेट के माध्यम से फिल्म व अन्य डिजिटल सामग्री (कंटेंट) उपलब्ध कराता है. ‘जोगी’ में दिलजीत दोसांझ, मोहम्मद जीशान अय्यूब और हितेन तेजवानी के अलावा कुमुद मिश्रा और अमायरा दस्तूर ने भी अभिनय किया है. निर्देशक जफर ने हिमांशु किशन मेहरा के साथ मिलकर फिल्म का निर्माण किया है.

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