कृष्ण कुंज योजना सांस्कृतिक महत्व के पेड़ों को सहेजने की अनुकरणीय पहल- फूलोदेवी नेताम

रायपुर/आज कृष्ण जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के द्वारा छत्तीसगढ़ में कृष्ण कुंज का लोकार्पण किया गया व मुख्यमंत्री की पहल पर छत्तीसगढ़ के सभी नगरीय क्षेत्रों में ’कृष्ण कुंज’ विकसित किए जा रहे हैं जन्माष्टमी के अवसर पर कृष्ण कुंज में मुख्यमंत्री ने सभी कलेक्टरों को ’कृष्ण-कुंज’ विकसित करने के लिए वन विभाग को न्यूनतम एक एकड़ भूमि का आबंटन करने के निर्देश दिए भी दिए हैं

 सांसद फूलोदेवी ने बताया कि भगवान श्री कृष्ण ने लोगों को कर्मवादी बनने का उपदेश दिया भगवान श्री कृष्ण ने जिन बातों का उपदेश दिया, उन्हें स्वयं भी जीया वे सही मायने में हमें जीवन जीने की कला सिखाते हैं सांस्कृतिक विविधताओं से परिपूर्ण छत्तीसगढ़ का हर एक पर्व प्रकृति और आदिम संस्कृति से जुड़ा हुआ है इनके संरक्षण के लिए छत्तीसगढ़ी के तीज-त्यौहारों को आम लोगों से जोड़ा गया और अब ‘कृष्ण-कुंज’ योजना के माध्यम से इन सांस्कृतिक महत्व के पेड़ों को सहेजने की अनुकरणीय पहल मुख्यमंत्री के माध्यम से हो रही है जो आने वाली पीढ़ियों को एक बेहतर कल की ओर ले जाएगी और एक नया छत्तीसगढ़ गढ़ने में अपनी भूमिका निभाएगी साथ ही नगरीय क्षेत्रों के 162 स्थानों में विकसित कृष्ण-कुंज में बरगद, पीपल, कदंब जैसे सांस्कृतिक महत्व के एवं जीवनोपयोगी आम, इमली, बेर, गंगा इमली, जामुन, गंगा बेर, शहतूत, तेंदू ,चिरौंजी, अनार, कैथा, नीम, गुलर, पलास, अमरूद, सीताफल, बेल, आंवला के वृक्षों का रोपण किया जा रहा है जिससे वृक्षारोपण को जन-जन से जोड़ने, सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए प्रदेश में ‘कृष्ण-कुंज’ विकसित किए जा रहे है विगत वर्षों में शहरीकरण की वजह से हो रही अंधाधुंध पेड़ों की कटाई से इन पेड़ों का अस्तित्व खत्म होता जा रहा है आने वाली पीढ़ियों को इन पेड़ों के महत्व से जोड़ने के लिए ‘कृष्ण-कुंज’ की पहल की जा रही है।

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