Covid-19 wave 3 : कोरोना की तीसरी लहर बच्चों के लिए जानलेवा होगी , जानें खतरे को टालने का उपाय

BY-एजेंसी
साल 2020 में जानलेवा कोरोना वायरस ने दस्तक दी थी। उस समय लोगों को लगा था कि 2020 में ही दुनिया को इस महामारी से निजात मिल जाएगी लेकिन भारत में ऐसा नहीं हुआ।
साल 2021 में कोरोना की दूसरी लहर आई जिसने बच्चों को भी बुरी तरह से प्रभावित किया है। कोविड-19 की इस दूसरी लहर में मरने वाले लोगों की संख्या भी काफी बढ़ी है और अब विशेषज्ञों का कहना है कि देश में आने वाली कोरोना की तीसरी लहर का टारगेट बच्चे होंगे।
क्यों बच्चों पर है खतरा
कोरोना के देश में तीसरी बार दस्तक देने पर विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार बच्चे सबसे ज्यादा इस वायरस की चपेट में आएंगे। तीसरी लहर के आने तक देश में अधिकतर वयस्कों को कोविड-19 वैक्सीन की पहली डोज लग चुकी होगी जिससे वो बच्चों की तुलना में कोरोना से ज्यादा सुरक्षित होंगे।
कोरोना वैक्सीन को सिर्फ 16 साल से अधिक उम्र के लोगों पर ही टेस्ट किया गया है। इसलिए इस समय विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों को यह वैक्सीन न लगाने की सलाह दी है। बच्चों को कोरोना से सबसे ज्यादा खतरा होने के बावजूद भी डब्ल्यूएचओ ने बच्चों को वैक्सीन न लगवाने की बात कही है।
वसंत कुंज के फोर्टिस अस्पताल के पीडियाट्रिशियन डॉक्टर पवन कुमार का कहना है कि कोई भी वैक्सीन लाने से पहले, उसका ट्रायल किया जाता है। अभी कोविड-19 की वैक्सीन का ट्रायल सिर्फ वयस्कों और वृद्धों पर ही किया गया है इसलिए फिलहाल उन्हें ही यह टीका लगाया जा रहा है।
डा. पवन कुमार कहते हैं अभी तक बच्चों पर कोरोना वैक्सीन का ट्रायल नहीं किया गया है इसलिए फिलहाल बच्चों को यह वैक्सीन नहीं दी जा रही है और इससे पहले कोरोना ने बच्चों को ज्यादा प्रभावित भी नहीं किया था। इसलिए भी शोधकर्ताओं ने अब तक बच्चों पर कोरोना वैक्सीन को लेकर ट्रायल नहीं किया था।
अब कोरोना की दूसरी लहर बच्चों को भी अपनी चपेट में ले रही है इसलिए अब बच्चों के लिए भी वैक्सीन के उपयोग और ट्रायल की जरूरत बढ़ गई है।
बच्चों को क्यों नहीं मिल रही है वैक्सीन
कोरोना वैक्सीन को सिर्फ 16 साल से अधिक उम्र के लोगों पर ही टेस्ट किया गया है। इसलिए इस समय विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों को यह वैक्सीन न लगाने की सलाह दी है। बच्चों को कोरोना से सबसे ज्यादा खतरा होने के बावजूद भी डब्ल्यूएचओ ने बच्चों को वैक्सीन न लगवाने की बात कही है।
वसंत कुंज के फोर्टिस अस्पताल के पीडियाट्रिशियन डॉक्टर पवन कुमार का कहना है कि कोई भी वैक्सीन लाने से पहले, उसका ट्रायल किया जाता है। अभी कोविड-19 की वैक्सीन का ट्रायल सिर्फ वयस्कों और वृद्धों पर ही किया गया है इसलिए फिलहाल उन्हें ही यह टीका लगाया जा रहा है।
डा. पवन कुमार कहते हैं अभी तक बच्चों पर कोरोना वैक्सीन का ट्रायल नहीं किया गया है इसलिए फिलहाल बच्चों को यह वैक्सीन नहीं दी जा रही है और इससे पहले कोरोना ने बच्चों को ज्यादा प्रभावित भी नहीं किया था। इसलिए भी शोधकर्ताओं ने अब तक बच्चों पर कोरोना वैक्सीन को लेकर ट्रायल नहीं किया था।
अब कोरोना की दूसरी लहर बच्चों को भी अपनी चपेट में ले रही है इसलिए अब बच्चों के लिए भी वैक्सीन के उपयोग और ट्रायल की जरूरत बढ़ गई है।
कब आएगी कोरोना की तीसरी लहर
कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले देशों में अमेरिका का नाम भी शामिल है। इस देश में दूसरी लहर के लगभग ढाई महीने के बाद तीसरी लहर ने दस्तक दी थी और इसमें पहले से भी ज्यादा मौतें हुई थीं।
अब भारत में ऐसा ही होने की आशंका है। विशेषज्ञों की मानें तो देश में अभी दूसरी लहर भी अपने पीक पर नहीं पहुंची है और इतनी मौतें हो चुकी हैं। जरा सोचिए जब दूसरी लहर अपने पीक पर पहुंची तो क्या होगा और इससे भी ज्यादा खतरनाक बताई जा रही तीसरी लहर को मासूम बच्चे कैसे झेल पाएंगे?
तीसरी लहर से बचने के लिए पैरेंट्स क्या करें
इम्यूनिटी हमारे शरीर का एक हिस्सा है और अगर शरीर स्वस्थ है तो इम्यूनिटी भी मजबूत रहेगी और बीमारियां कम होंगी। वहीं मल्टीविटामिन भी कोरोना से लड़ने का काम नहीं करते हैं बल्कि आपकी इम्यूनिटी को मजबूत करते हैं जिससे वायरस से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।
बच्चों को कोरोना की तीसरी लहर से सुरक्षित रखने के लिए डॉ. पवन कहते हैं कि बच्चों को हेल्दी खाना खिलाएं जिसमें फल-सब्जियां, फ्रूट जूस और अंडे शामिल हों।
जिन बच्चों की खानपान की आदतें अच्छी होती हैं, उन्हें बीमारियां और कोरोना वायरस भी ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा पाता है। वहीं कमजोर और कुपोषण के शिकार बच्चों के लिए कोविड-19 खतरनाक साबित हो सकता है। इसलिए अपने बच्चे को हेल्दी खाना खिलाएं और उसकी बॉडी को दुरुस्त करें ताकि इससे उसकी इम्यूनिटी मजबूत हो सके।



