इरादों की प्रत्यंचा से ऐसी टंकार निकले कि भय,निराशा,अंधेरा गली-गली दुबक जाए

धार…एक अभियान(विसंगतियों के खिलाफ शंखनाद)/नवीन श्रीवास्तव,पत्रकार,बस्तर
भ्रष्टाचार,असमानता..भेद ,गरीबी,बेबसी कहां खत्म हुए हैं .. बुरे तो अभी भी है और बुराई भी, झूठ भी..फर्क यह है कि झूठ पर आजकल मक्कारी का वर्क चढ़ा दिया गया है.. सफेदपोश मुखोटे धारियों की संख्या बढ़ रही है..साल में एक बार रावण का पुतला दहन कर हम शायद सोचने लगते हैं कि रावण तो मर गया..पर कहां मरा वह लगता है उसके नाभि में अमृत का कुछ बून्द बचा रह गया था.अब तो एक ही उपाय है ..राम के सबक को ढूंढा जाये..उस पुरुषार्थ को गढ़ा जाए ..जिससे राम हमे स्वीकार कर ले.. हौसला मजबूत कर बुराई के खिलाफ खड़ा होना पड़ेगा..इरादों की प्रत्यंचा से ऐसी टंकार निकलना चाहिए..कि अंधेरा गली गली दुबक जाये.अन्याय सिर पर पैर रख कर भागने में ही भलाई समझे हिम्मत ऐसा करते हैं कि जिस्म से रोशनी फुट पड़े.. भक्क से..निराशा,कुंठा,रोग शोक,दुःख..सब नष्ट हो जाए.. जिनके पास कलम की शक्ति है..उन्हें यह भी मालूम होगा की ..व्यर्थ समय जाया करने का नहीं है फिर कलम में वीर्य सा ऊष्मक ऊर्जा लिए स्याहियों से बहुत कुछ बदला जा सकता है…आओ आत्ममुग्धता, देह विन्यास , सफलता,धन मात्र के लिए लेखन का वरदान नहीं होता …जेहन में जिंदगी की जड़ें गहरे करने सामर्थ्य है तो लिखते हैं ऐसा कुछ कि पन्नों से निकल कर शब्द का पौरूष पन देह धर ले..चारों तरफ से परिवर्तन का बयार बहने लगे..प्रेम का हाँ प्रेम का..गंगाजल स्रोत फुट पड़े.. वक्त ने हमको चुना है..जिम्मेदारी अपनी है स्कूल जाते बच्चों को देखें.. सोचें वह किसी जर्जर छत के नीचे तो नहीं पढ़ रहा..हँसते बच्चियों को देखे और सोचे की काश इनकी हंसी ठहर जाती..माँ की छाती से चिपके बच्चें को देखें यह माँ होने का निश्छल सुख..जमाने के बोझ से दबे लोगों को देख हम सुखी कैसे रह सकते हैं..बहुत काम है..शोर में दफन ना करें..ज्यादा ना सही अपनी भूमिका निभाते हैं..अपना काम ईमानदारी से करते हैं..जितना कर सकते है उतना मिलकर करते हैं.. इतना भी कम नहीं देखना इस तरह का संकल्प लेते ही आपको देख अप्रियतम खूबसूरत सलौने श्री राम कैसे मुस्कुरा उठेंगें..उनके अधरों को देखना..ध्यान से देखना..उनके होंठों से ध्वनि फूटता सुन सको तो सुनाई देगा….आप भी संग बुदबुदाना..निसिचर हीन करहु महि..निसिचर हिन् करहू महि..।। पावन राम नवमी पर शुभकामनाओं के साथ… नवीन श्रीवास्तव, पत्रकार🙏🙏🙏



