प्रेम के समर्थन में..(2),कठिनाइयां ,विपदा कितनी भी हो…धारण करने प्रेम ही श्रेष्ठ धर्म

मिलकर निकलो.. सड़कों पर बुराइयों के खिलाफ इस तरह की.गुंडे मवाली थर थर कांपने लगे फिर देखते हैं कौन छेड़ता है हमारे बहनों और बेटियों को

पर . पहले जरूरी है कि ह्रदय के तार में बहते प्रेम को पहचान लें ..इसे ही बांटे, इसे ओढ़े ..इसे ही बिछाए ..प्रेम ही प्रेम

विषमता के खिलाफ धरती में प्रेम को सहेजना भी पत्रकारिता का धर्म है ..

धार..एक अभियान (15 वर्षों से लगातार विसंगतियों के खिलाफ शब्दों का शंखनाद, अनेक समाचारपत्रों में प्रकाशन) नवीन श्रीवास्तव पत्रकार,लेखक,बस्तर

प्रेम.. आज नहीं तो कल हमारे अंदर से ,समाज से इस धरती पटल से विकृति को और खामियों को दूर करेगा.. विपदा कितना भी कठिन हो धारण करने के लिए प्रेम ही श्रेष्ठ धर्म है इसे महिमामंडित करने की जरूरत है.. इसे पीठ पीछे पोटली बनाकर कोने में फेंकने से काम नहीं चलेगा… आकर्षण और वासना दैहिक सुख को भोगने वाले भावनाएं शक्तिशाली होने लगी है इसी मरोड़ कर खत्म करना है और प्रेम को बाजार के खिलाफ लांच करना है.. आइए साथ मिलकर चलते हैं …कहीं बाहर खड़ी कर आस्तीन चढ़ा और आईने में भुजा और सीने को नापते कहीं सिगरेट शराब और दूसरी तरह के नशे में चूर नालियों के कीड़ों सा हर दिन को ऐसे ही खत्म करने वाले युवाओं का समय हर दिन नष्ट हो रहा … जीवन बहुत कीमती है जब हम सह्रदय होंगे.. अनुशासन में होंगे तभी प्रेम हमको चुनेगा दूसरों की खुशी से बढ़कर कोई ख्वाब नहीं..कोई सफलता नहीं अगर हम किसी के काम नहीं आये तो..सब बेकार..अगर किसी को भुजाओं में अथाह शक्ति का अहसास है ..तो मिलकर निकलो सड़कों पर बुराइयों के खिलाफ इस तरह की.गुंडे मवाली थर थर कांपने लगे फिर देखते हैं कौन छेड़ता है हमारे बहनों और बेटियों को ..पर पहले जरूरी है कि ह्रदय के तार में बहते प्रेम को पहचान लें ..इसे ही बांटे, इसे ओढ़े ..इसे ही बिछाए ..फिर देखिएगा हमारे अंदर से बुराइयां भाप बनकर उड़ने लगेगा..(जारी)

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