नवाब मलिक ने समीर वानखेड़े के पिता के मानहानि केस पर हाई कोर्ट में दिया जवाब, गड़बड़ी छुपाने की कोशिश

महाराष्ट्र के मंत्री नवाब मलिक ने मंगलवार को बॉम्बे हाई कोर्ट को बताया कि एनसीबी के जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े के पिता ध्यानदेव वानखेड़े की ओर से उनके खिलाफ दायर मानहानि का मुकदमा गड़बड़ी को छिपाने का एक प्रयास है। इसके साथ-साथ नवाब मलिक ने यह भी दावा किया है कि वानखेड़े के खिलाफ उनका कोई भी बयान झूठा नहीं है। मलिक ने अपने बयान से जुड़े कुछ सबूत भी कोर्ट को दिए हैं।
दरअसल, समीर वानखेड़े के पिता ध्यानदेव वानखेड़े ने मलिक के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर कर 1.25 करोड़ रुपए का हर्जाना मांगा है और साथ ही एनसीपी नेता मलिक को वानखेड़े के खिलाफ कोई भी ऐसी गलत बयानबाजी नहीं करने की मांग की है जो कि उनके परिवार की बदनाम करे या फिर प्रतिष्ठा को नुकसान पहुचाए।
उनका कोई भी बयान गलत नहीं
नवाब मलिक ने अपने हलफनामे में कोर्ट को बताया है कि उनके द्वार दिया गया कोई भी बयान गलत नहीं है और उनके द्वारा पेश किए गए सबूतों ने सरकारी तंत्र को समीर वानखेड़े के खिलाफ सुधारात्मक कदम उठाने में मदद की है, जो कि हाल में कुछ हाई प्रोफाइल ड्रग्स मामले को संभाल रहे थे, जिसमें बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान का बेटा आर्यन खान भी शामिल है।
वानखेड़े के खिलाफ कार्रवाई सबूतों की प्रामाणिकता है
मलिक की ओर से दायर हलफनामे में कहा गया है कि समीर वानखेड़े विजिलेंस इंक्वायरी का सामना कर है और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के डायरेक्टर ने समीर वानखेड़े की नेतृत्व वाली मुंबई यूनिट से कुल छह मामले की जांच को दिल्ली में ट्रांसफर कर दिए हैं। एनसीपी नेता ने कहा कि इस प्रकार से समीर वानखेड़े के खिलाफ कार्रवाई शुरू करना प्रतिवादी (मलिक) की ओर से पेश किए गए सबूतों की प्रामाणिकता को दर्शाता है।
मलिक बोले- मुकदमे के जरिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाने की कोशिश है
हलफनामे में कहा गया है कि वादी (ध्यानदेव वानखेड़े), यह मुकदमा दायर करके, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत प्रतिवादी को दी गई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाने की कोशिश कर रहे हैं। जिसका इस्तेमाल प्रतिवादी जनता की भलाई के लिए किया है। मानहानि का मुकदमा ध्यानदेव वानखेड़े के बेटे समीर वानखेड़े की ओर से की गई ‘अवैधताओं’ को छिपाने के प्रयास के अलावा और कुछ नहीं है। मलिक ने कोर्ट से मानहानि के मुकदमे को खारिज करने की मांग करते हुए कहा कि यह सुनवाई योग्य नहीं है क्योंकि वादी न केवल अपने लिए बल्कि अपने परिवार के सदस्यों के लिए भी राहत की मांग कर रहा है।



