रास्ते में पड़े हैं कितने मौके जिंदगी के। उठा लिए तो सिक्का नहीं तो पत्थर है जिंदगी।।

कब एक परंपरा, विधि, कारीगरी को परिभाषित करने वाले बांस के बने तुपकी …. बाजारू प्लास्टिक के बंदूक में बदल गए

बेबाक.. अनकही कहानी/नवीन श्रीवास्तव, पत्रकार एवंलेखक

चर्चा-ए-चौराहा:चांदनी चौक(9)/जगदलपुर

एक चौक जिसके एक तरफ सेहत की संजीवनी बांटने वाला अस्पताल… दूसरे तरफ नशेमन शराब की दुकान.. मुखोटे धारी जिम्मेदार लोगों के आंखों में मोतियाबिंद के जाले हो तो उन्हें यह विसंगति दिखेगा नहीं.. अब देखिये शहर में संस्कृति, पर्यावरण बचाने अभियान चलाने वाले कम नहीं पर .. पता ही नही चल पाया कि कब एक परंपरा, विधि, कारीगरी के अदुभुत प्रतीक बांस के बने तुपकी …. कब बाजारू प्लास्टिक के बंदूक में बदल गए… जो बांटने वाले हैं वे बांटते रहें दीवार, दरवाजे..बदलते रहें..!खेलते रहें बच्चों की तरह बांटने का खेल पर ..बस्तर की सनातन जमीनी तासीर नही बदलेगा जगदलपुर के मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल की दीवार में एक साथ दो नायकों की तस्वीरे भी जैसे इसी तरह का संदेश दे रहें हो …. मेडिकल कॉलेज व सह अस्पताल का नामकरण उस समय के सत्ता में मौजूद भाजपा पार्टी द्वारा बस्तर के कद्दावर एवं जमीन से जुड़े नेता स्वर्गीय श्री बलीराम कश्यप जी के नाम किया गया ..समय के साथ सत्ता परिवर्तन हुआ दूसरी पार्टी आई कांग्रेस जिनके द्वारा सह अस्पताल का नाम बदल कर रखा गया है महेंद्र कर्मा…पर जनता के लिए यह कितना बदला.. दिलचस्प बात यह है कि इस इमारत में सह अस्पताल के नाम बदले जाने के बाद अब मेडिकल कॉलेज के बाहरी दीवारों में दोनों नेताओं का नाम आस पास है .. गेट 1 निकट दीवार में लिखा है स्व. बली राम कश्यप स्मृति शासकीय महाविद्यालय, जगदलपुर एवं गेट 2 पर लिखा है शहीद महेंद्र कर्मा स्मृति अस्पताल डिमरापाल…भले दरवाजे अलग हो पर एक ही दीवार पर उकेरे बस्तर के दोनों नेताओं की तस्वीर प्रतीत होता है मानो कह रहे हो — देखो हम दोनों की जड़ें तो बस्तर के इसी एक जमीन से है …यह दोनों वही नेता हैं जिनके होने की धमक से प्रदेश की राजनीति में तस्वीर भी बदली फिजा भी बदली … स्व श्री बलीराम कश्यप को कौन नहीं जानता प्रदेश के राजनीतिक जेहन में उनके व्यक्तित्व की तस्वीर कभी धूमिल नहीं हो सकती आदिवासियों के हक और अपने सिध्दांतो के लिए स्व श्री कश्यप कितने निर्भय और बेबाक थे यह सर्व विदित है अगर कहा जाए कि बस्तर में उनकी छवि ने भाजपा के लिए जनाधार तय किया तो आश्चर्य नहीं … इसी तरह पार्टी से उठकर लोगों के दिलों तक पहुंचने में कामयाब जन नेता रहे महेंद्र कर्मा जी पत्रकार होने के नाते अनेक हस्तियों और व्यकितत्व से मिलने का सामीप्य का मुझे अवसर मिला उनमें एक शहीद कर्मा जी भी हैं ..उस समय मैं एक साप्ताहिक अखबार में अपनी सेवायें दे रहा था यंग छत्तीसगढ़ … श्री कर्मा उस समय विधानसभा में विपक्ष के नेता थे जितनी बार भी मैं उनसे मिला वे बड़े ही सरलता से मिलते थे.. आज ऐसी सरलता दुर्लभ होते जा रहा है.. उनकी सहजता व आवाज की खनक ..अभी भी मेरे स्मृतियों के कोने में जीवंत होने लगते हैं ..भला कौन मार सकता है उन्हें ।यंग छत्तीसगढ़ के प्रकाशित दिनांक 21 जुलाई से 27 जुलाई अंक 6 में मेरे द्वारा लिया गया उनका साक्षात्कार प्रकाशित हुआ शीर्षक था.”..नक्सलियों की धरती हिलाने वाला लीडर” कर्मा उन नेताओं में थे जो कार्यों के अनुपात में भविष्य को देख लेते थे मुझे याद आता है उस साक्षात्कार के दौरान मेरे एक सवाल के जवाब में कर्मा जी ने भविष्यवाणी सा करते हुए कहा था – हमें पूरा विश्वास है कि कांग्रेस सत्ता में आएगी और भाजपा भरस्टाचार, निष्क्रिय प्रशासनिक ढांचों के चलते हारेगी..सच भ्र्ष्टाचार ..साइलेंट किलर है .. जो देश के उन्नति को दीमक की तरह खाये जा रहा है और इसका हल किसके पास है????बहरहाल शहीद श्री कर्मा के उक्त कथन से चाहे तो कांग्रेस भी सीख सकती है कि रास्ते मे आगे बढ़ने जो खामियां है ..उसे दोहराया ना जाये ..।(जारी)

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