ब्रेकिंग: नंदीग्राम में ममता बनर्जी ने मारी बाजी,शुवेंदु अधिकारी को 1200 वोटों से हराया

कोलकाता: ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने शुवेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) को हराकर नंदीग्राम से जीत हासिल कर ली है. 5 राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजों में नंदीग्राम (Nandigram) विधानसभा सीट पर पूरा देश टकटकी लगाए देख रहा था. CM ममता के खिलाफ उनके पुराने साथी और बीजेपी नेता शुवेंदु ने दो-दो हाथ किया, लेकिन वो भी दीदी को हराने में नाकामयाब हो गए.
नंदीग्राम जीतकर ममता ने बचाई ‘नाक’
ममता बनर्जी ने शुवेंदु अधिकारी को 1200 वोटों से हरा दिया है. जैसे ही बंगाल में वोटों की गिनती शुरू हुई, हर किसी को नंदीग्राम सीट का रुझान जानने की बेचैनी हो रही थी. हर कोई जानना चाहता था कि ममता बनर्जी को यहां बढ़त मिलती है या मात? वोटों की गिनती पूरी हो चुकी है और ममता बनर्जी ने शुवेंदु को हरा दिया है. इसी के साथ ममता बनर्जी ने ना सिर्फ अपनी ताकत दिखा दी, बल्कि उन्होंने अपनी ‘नाक’ कटने से बचा ली.
भाजपा के शुवेंदु अधिकारी इस सीट पर कई राउंड तक आगे चले, ऐसा लग रहा था कि ममता दीदी के लिए काफी बुरा संकेत साबित होने वाला है. हालांकि ममता बनर्जी को आखिरकार जीत मिल ही गई. दीदी की पार्टी टीएमसी इस चुनाव को एकतरफा जीतती दिख रही है.
नंदीग्राम सीट का समीकरण समझिए
नंदीग्राम का समीकरण समझाने के लिए आपको इस सीट पर हुई पिछले तीन चुनावी जंग के बारे में बताते हैं. 2007 से पहले तृणमूल का वर्चस्व बंगाल में उतना दमदार नहीं था, जितना नंदीग्राम आंदोलन के बाद हुआ. 2006 के चुनाव की बार करें तो इस सीट से एसके. इलियास मोहम्मद (Illias Mahammad Sk.) ने ममता की पार्टी TMC के एसके सुपियां (Sk. Supian) को साढ़े 5 हजार से अधिक वोटों से हराया था.
जिसके बाद 2011 के चुनाव में ममता की पार्टी ने नंदीग्राम से जीत हासिल की. नंदीग्राम में जीत के साथ ही दीदी को पहली बार सीएम की कुर्सी पर बैठने का सौभाग्य प्राप्त हुआ. इस बार TMC की फिरोजा बीबी ने CPI के परमानंद भारती को 40 हजार से अधिक वोटों से मात दी थी.
2016 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम से TMC के बैनर तले शुवेंदु अधिकारी मैदान में उतरे और उन्होंने CPI के अब्दुल कबीर शेख को 81 हजार 230 वोटों से हराया.
ममता ने क्यों चुना नंदीग्राम?
2011 और 2016 में ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल (West Bengal) की भवानीपुर सीट से विधानसभा चुनाव जीत चुकी हैं. लेकिन इस बार उन्होंने नंदीग्राम के लिए भवानीपुर की सुरक्षित सीट छोड़ दी. टीएमसी और बीजेपी के लिए नंदीग्राम की सीट आखिर नाक की लड़ाई क्यों बन चुकी थी?
दीदी के दिलेरी का नंदीग्राम में स्वागत
ममता ने खुद अपने पुराने साथी शुवेंदु को चैलेंज किया और नंदीग्राम से चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया. ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की मानें तो वो 2024 में दिल्ली कूच भी कर सकती हैं, लेकिन ममता दीदी ने नंदीग्राम से जीत हासिल करके ये साबित कर दिया कि वो सचमुच एक शेरनी से कम नहीं हैं.
नंदीग्राम का धार्मिक समीकरण देखें तो, नंदीग्राम में 70% हिंदू हैं और 30% मुस्लिम है. अगर कुल वोटर की बात करें 2,13,000 वोटर में 1 लाख 51 हजार हिंदू वोटर हैं और 62 हजार मुस्लिम वोटर हैं. हालांकि कोई भी फैक्टर दीदी को परेशान करने में कामयाब नहीं हो पाया.



