स्वामी चिन्मयानंद को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने का आदेश, दुष्कर्म का मामला है

अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-तृतीय/एमपीएमएलए कोर्ट असमा सुल्ताना ने 11 साल पुराने शिष्या से दुष्कर्म के मुकदमे में पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री चिन्मयानंद को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने के आदेश पुलिस को दिए हैं।
चिन्मयानंद की ओर से अधिवक्ता ने प्रार्थना पत्र देकर उनकी वृद्धावस्था और बीमारी के मद्देनजर अदालत में हाजिर होने के लिए समय सीमा बढ़ाने की मांग की थी जिसे कोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देकर खारिज कर दिया। अदालत ने मुकदमे की अगली तारीख नौ दिसंबर दी है।
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-तृतीय/एमपी-एमएलए कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अभियुक्त (चिन्मयानंद) को 30 नवंबर तक न्यायालय में आत्मसमर्पण करने के लिए आदेशित किया गया था। अभियुक्त द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में आत्मसमर्पण नहीं किया गया है। अभियुक्त द्वारा प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर समय प्रदान करने की याचना की गई है। यह न्यायालय सर्वोच्च न्यायालय के अधीनस्थ है। इस न्यायालय को यह अधिकार नहीं है कि वह सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दी गई समय सीमा को बढ़ाए। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की प्रति थानाध्यक्ष, कोतवाली को प्राप्त हुई है।
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-तृतीय/एमपीएमएलए कोर्ट ने चिन्मयानंद के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करने का आदेश किया। साथ ही थानाध्यक्ष को आदेशित किया कि वह अभियुक्त को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करें। आदेश की एक प्रति पुलिस अधीक्षक को भेजने का आदेश न्यायालय ने दिया है।
चिन्मयानंद की ओर से न्यायालय में प्रार्थना पत्र पेश किया गया कि प्रार्थी एक कमजोर व वृद्ध व्यक्ति है। वह अपनी गंभीर बीमारियों आदि के कारण न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो पा रहा है। प्रार्थी जानबूझकर कोई गलती नहीं कर रहा है। उन्हें न्यायालय में पेश होने के लिए समय दिया जाए।
चिन्मयानंद के प्रार्थना पत्र पर अभियोजन पक्ष ने आपत्ति की। अधिवक्ता फिरोज हसन खां ने बताया कि समय प्रदान करने के लिए 28 नवंबर को एक प्रार्थना पत्र सर्वोच्च न्यायालय में दिया जा चुका है। इस पर सुनवाई होनी है।



