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मैं दिया हूं, मेरी लड़ाई तो अंधेरे से है। हवा बेवजह मेरे खिलाफ है..

 

धार… एक अभियान/ नवीन श्रीवास्तव, पत्रकार ,लेखक स्तंभकार

 

सादर गुलजार की पंक्तियों के साथ.. शुरुआत करता हूं..एक कहावत तो आप सब ने सुनी होगी बंदर के हाथ में उस्तरा ..पर आपने कभी सुनी नहीं होगी कि बंदर के हाथों किसी का खून हो गया और कोई मर गया… पर ..पर अपने हरे भरे जीवनदायनी बस्तर में कुछ युवाओं की बुद्धि .. जवान होते उम्र के बाद भी इतनी सठिया गई है .. कि उस चाकू से ..बस्तर में जहां बस्तर में बांस को छिल कर, काटकर उससे खूबसूरत कलाकृतियां बनाई जाती है .. उसी बस्तर की धरती पर बस्तर की ही नई पीढ़ी एक दूसरे की खून बहा रही है.. नहीं यह सही नहीं है.. जिस बस्तर में हरे- भरे पेड़, उसकी हरियाली ,झरने, खूबसूरत वादियां जिंदगी को सहेजने उसे खूबसूरत बनाने की सीख देती है.. उसी बस्तर के तासीर और मिजाज के खिलाफ है यह क्या हो रहा .. गत दिवस जगदलपुर स्थानीय बस स्टैंड के सामने कुछ युवकों ने चाकू से युवक की हत्या कर दी..यह और भी गंभीर बात है कि इसमें नाबालिक भी सामने आए हैं !.. इस घटना से अब बस्तर की सांस्कृतिकधानी जगदलपुर में कहीं बैचेनी है, कहीं गुस्सा , कहीं खौफ तो कोई सन्न है.. गंभीर बात यह है कि .. यहां इस तरह हमले की पहली घटना नहीं है ..तो क्या यह आखिरी हो सकती है.. कैसे और क्या किया जाए की इसकी पुनरावृत्ति ना हो सोचिए?

 

क्या बाजारू षड्यंत्र ने हमारी नई पीढ़ी को डम्प कर दिया है या फिर सोशल मीडिया का पागल पन युवाओं के नसों में उतर रहा इतना कि आजकल के यही बच्चे कुछ कर गुजरने के अपने हौसले खो रहे हैं .. या फिर नशे की आदत में हमारी पीढ़ी जोंबी बनते जा रही है समय रहते हमको सोचना होगा ..?

हमारी नई पीढ़ी को समझनी होगी जानना होगा कि ..

दुनियां को जीतने का हुनर किसी हथियार में नहीं हमारे जेहन के अंदर, दिमाग में होता है, मस्तिष्क में… विदेश जाने से पहले स्वामी विवेकानंद आशीर्वाद लेने माता शारदा के पास पहुंचे थे तो गुरु मां ने उनसे चाकू मांगी.. तब विवेकानंद ने चाकू का फल (धार)अपनी और रखते हुए चाकू के हत्थे को मां को दिया था.. इतनी गहरी समझ देखकर माता ने खुश होकर विवेकानंद को दुनिया जीतने आशीर्वाद दिया था..

मौके पर…

नई पीढ़ी के पढ़ने वाले मेरे बच्चों मोबाइल से अपने लिए समय निकालो ..ज्यादा से ज्यादा किताबें पढ़ना सीखो , ज्यादा से ज्यादा किताबें पढ़ो विचार करना सीखो , दिमाग से बेचैनी खत्म होगी दूसरों को नुकसान पहुंचाने का मन नहीं करेगा, कोई लड़ाई हो युद्ध हो या जिंदगी .. जीतने के लिए हथियार से नहीं दिमाग से शक्तिशाली होना जरूरी है फिर जब तुम शक्तिशाली हो जाओगे मजबूत हो जाओगे तो हथियार खुद हाथ से छूट जाता है.. फिर मिलता हूं..नवीन श्रीवास्तव, पत्रकार

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