आईसीयू मरीजों में सेप्सिस से बचाव को लेकर प्रशिक्षण, प्रमाण पत्र देकर किया सम्मानित

भाठागांव l आईसीयू में भर्ती गंभीर मरीज को यदि सेप्सिस हो जाए तो उसकी जान बचाना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इसी को देखते हुए मरीजों को समय रहते बचाने और स्टाफ को जागरूक करने के उद्देश्य से उर्मिला मेमोरियल हॉस्पिटल भाठागांव में विश्व सेप्सिस दिवस के अवसर पर एक विशेष जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में अस्पताल के सभी डॉक्टरों एवं नर्सिंग स्टाफ को सेप्सिस की प्रारंभिक पहचान, उसके लक्षण और त्वरित इलाज को लेकर गहन प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि सेप्सिस कोई साधारण संक्रमण नहीं, बल्कि शरीर की संक्रमण के प्रति एक अनियंत्रित और खतरनाक प्रतिक्रिया है, जिसमें धीरे-धीरे शरीर के महत्वपूर्ण अंग काम करना बंद कर देते हैं। यदि समय पर इसकी पहचान न की जाए तो यह सेप्टिक शॉक में बदल जाता है और मरीज की मृत्यु तक हो सकती है। प्रेशर कम होना और पेशाब कम बनना जैसे लक्षण दिखें इसके लिए SOFA स्कोर, लैक्टेट लेवल, प्लेटलेट काउंट, बिलीरुबिन और क्रिएटिनिन जैसी जांचों का विशेष महत्व बताया गया।विशेषज्ञों ने “वन आवर बंडल” के बारे में भी जानकारी दी, जिसमें बताया गया कि सेप्सिस के संदेह पर एक घंटे के भीतर लैक्टेट की जांच, ब्लड कल्चर लेना, तुरंत ब्रॉड-स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक शुरू करना और जरूरत पड़ने पर तेजी से फ्लूड चढ़ाना बेहद जरूरी है इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेने वाले सभी नर्सिंग स्टाफ को प्रशिक्षण पूर्ण करने के बाद प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया, जिससे उनका मनोबल बढ़े और वे भविष्य में और भी बेहतर तरीके से मरीजों की सेवा कर सकें। डॉ. विनोद सिंह ने कहा कि हमारा मुख्य उद्देश्य आईसीयू में भर्ती मरीजों को बेहतरीन इलाज के साथ-साथ अस्पताल में होने वाले संक्रमण से भी बचाना है। इस कार्यक्रम में डॉ विनोद सिंह ,डॉ एस श्रीनाथ, डॉ मृगेंद्र सिंह, डॉ प्रफुल्ल, एचआर दीपजय परियाल सहित नर्सिंग स्टाफ उपस्थित रहे l



