अजमेर दरगाह मामले मे मुस्लिम संगठन बोले सुप्रीम कोर्ट करे दखल,उपासना स्थल अधिनियम 1991 का पूरी तरह हो पालन

जॉइंट कमेटी तहफ्फुज ए औकाफ, राजस्थान के बैनर तले हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुस्लिम संगठनों ने आज अजमेर और उत्तर प्रदेश के संभल मामले को लेकर बातचीत की। मुस्लिम संगठनों के पदाधिकारी ने कहा कि धार्मिक स्थलों को क्षति पहुंचाने का घिनौना काम किया जा रहा है। देश के आपसी सद्भाव को समाप्त करने की कोशिश की जा रही है। मस्जिदों को मंदिर बताकर अदालत में झूठे केस दायर किया जा रहे हैं। जमाते इस्लामी हिंद के अध्यक्ष नाजीमुद्दीन ने कहा, सर्वे के नाम पर मस्जिदों के स्टेटस को समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा है।
मुस्लिम संगठनों ने कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद के नीचे मंदिर होने के बहाने सर्वे कराकर देश का माहौल खराब किया गया। केंद्र सरकार वक्फ संशोधन बिल लाकर मुस्लिम को जमीनों को हड़पना चाहती है। संभल मामले में जिस तरह से मस्जिद को बचाने अपने हक की आवाज को उठाने को लेकर विरोध प्रदर्शन हुआ। इस दौरान पांच युवाओं की हत्या कर दी गई। उन्होंने बताया, संविधान हमने सहमति से बनाया। कानून सहमति से बनाया गया है। देश की आजादी में हम सबने मिलकर प्रयास किया। फिर हमने सहमति से संविधान बनाया।
दरगाह को लेकर दायर एप्लीकेशन निरस्त हो’
मुस्लिम संगठनों ने मांग की है कि अजमेर दरगाह मामले में निचली अदालत में दायर की गई एप्लीकेशन को ही निरस्त किया जाना चाहिए। संगठन SDPI उपाध्यक्ष शहाबुद्दीन खान ने कहा, हम सुप्रीम कोर्ट से यह मांग करेंगे कि जिस तरीके से निचली अदालत सर्वे को लेकर आदेश दे रही है, उनको लेकर गाइड लाइन जारी की जाए। संभल मामले की न्यायिक जांच करवाई जाए। जो युवा संभल मामले में मारे गए हैं, उनको 50-50 लाख रुपये मुआवजा दिया जाए। पुलिस कर्मियों ने उनको मारा है, उनके खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाए।
हाफिज मंजूर, जमीयत उलेमा हिंद ने मांग की कि निचली अदालतों को सुप्रीम कोर्ट यह निर्देश दें कि इस तरह की याचिकाओं को स्वीकार न किया जाए और उपासना स्थल अधिनियम 1991 की पूर्ण रूप से पालन की जाए। उन्होंने यह भी मांग की कि मजलूमों की पहली कर उनको इंसाफ के लिए संघर्ष करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता और मानव अधिकार संगठन APCR के राष्ट्रीय प्रवक्ता महासचिव नदीम खान को निशाना बनाते हुए दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ विवादित कार्रवाई की है। इस तरह की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की।



