दुनिया के सामने अब नया टेंशन, अंटार्कटिका में ताजा गिरी बर्फ में मिला माइक्रोप्लास्टिक

पहले से ही कोरोना संकट का सामना कर रही दुनिया के सामने आने वाले कुछ सालों में अब एक नया टेंशन सामने आ सकता है। वैज्ञानिकों को हाल ही में अंटार्कटिका पर हुई बर्फबारी में माइक्रोप्लास्टिक के कण मिले हैं, जिसे दुनिया के लिए बड़ा संकट बताया जा रहा है। दरअसल अंटार्कटिका पर यदि माइक्रोप्लास्टिक बर्फ के साथ पहुंच रहा है और भविष्य में इसकी रफ्तार बढ़ती है तो बर्फ के पिघलने की गति तेज हो सकती है, जो धरती के पर्यावरण के लिए बिल्कुल भी अनुकूल नहीं है।
चावल के दाने से छोटे हैं माइक्रोप्लास्टिक
शोध पत्रिका ‘द क्रायोस्फीयर’ में हाल ही में प्रकाशित शोध में बताया गया है कि अंटार्कटिक क्षेत्र के लिए एक गंभीर खतरे पैदा हो सकता है। पहले के अध्ययनों में पाया गया था कि माइक्रोप्लास्टिक (चावल के दाने की तुलना में बहुत छोटे प्लास्टिक के टुकड़े) का पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यह जीवों में और मनुष्यों पर भी विकास, प्रजनन और सामान्य जैविक कार्यों को सीमित करता है।
कैंटरबरी विश्वविद्यालय ने किया शोध
गौरतलब है कि न्यूजीलैंड में कैंटरबरी विश्वविद्यालय में PHD छात्र एलेक्स एवेस ने 2019 के आखिर में अंटार्कटिका में रॉस आइस शेल्फ से बर्फ के नमूने एकत्र किए। इन सैंपल पर वह लगातार शोध कर रहे थे। कैंटरबरी विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर लॉरा रवेल का इस बारे में कहना है कि जब एलेक्स एवेस ने 2019 में अंटार्कटिका की यात्रा की तो हमें यह उम्मीद जताई थी कि अंटार्कटिका में इतनी दूर माइक्रोप्लास्टिक नहीं मिलेगा, लेकिन हम गलत साबित हुए और रिसर्च के परिणाम चौंकाने वाले थे।
आखिर अंटार्कटिका पर कैसे पहुंचा माइक्रोप्लास्टिक
एवेस ने बताया कि उन्होंने अंटार्कटिका के अलग अलग क्षेत्रों में करीब 19 साइटों से बर्फ के नमूने इकट्ठा किए और जब जांच की तो उनमें माइक्रोप्लास्टिक की उपस्थिति पाई गई। शोध में पता चला कि वायुमंडलीय मॉडलिंग ने संकेत दिया कि माइक्रोप्लास्टिक्स ने हवा के माध्यम से हजारों किलोमीटर की यात्रा की। साथ ही यह भी आशंका है कि माइक्रोप्लास्टिक इंसानों की मौजूदगी से अंटार्कटिका में आया हो।



