उठो ..उठो ,प्रपंच को छोड़..यह जो आज सुबह का उजाला है खाश है.. इसमें तिरंगे की खुशबू है .. यह रोग प्रतिरोधक है..

नवीन श्रीवास्तव,पत्रकार,लेखक

धार…एक अभियान(विसंगतियों के खिलाफ शंखनाद) किश्त-103/नवीन श्रीवास्तव,पत्रकार,लेखक

हे देश के ईमानदार लोगों मैं जानता हूं .. इस देश की सारी व्यवस्थाएं आप जैसे लोगों से चल रही..आप सब ही माँ भारती के असली लाल हैं .. व्यवस्था चला रहे..जो जिम्मेदार है और भरस्ट हैं वे कीड़े-पतंगे से ज्यादा कुछ नहीं..मुझे यकीन है ..एक दिन सब ठीक हो जायेगा.. क्या हुआ की आप लोगों को कोई नहीं जानता,क्या हो गया कि जब सारे दुःख ,तकलीफों के बीच आप सब ईमानदारी से अपने हिस्से का काम करते हैं तो कोई तालियां नहीं बजाता.. आप सब जुटे रहें…दायित्वबोध लिए ईमानदारी से देश मजबूत होता है.. यही राष्ट्रवाद है ..डटे रहें गले में मैं फलाने…मैं ढेकाने.. का पोस्टर टांग कर घुमने वाले जयजयकार के बीच रहने वाले जोकरों से कुछ नहीं होने वाला..अपने महंगे कपड़ों के अंदर ऐसे लोग निपट नंगे हैं ईमानदारी सहज नहीं इन बेईमानों से,भरस्ट लोगों से कुछ नहीं हो सकता..डगर मुश्किल भरा है..पर याद रखें सृजन के लिए..प्रसव वेदना से गुजरना ही पड़ता है..गुजरना ही होगा..
सुबह हो गई..जागिये..मैं दस्तक दे रहा हूं.. तुम्हारे घर..दरवाजे पर..इंद्रियों से रस भोगने को आमंत्रित करता बाजार..हमारे संवेदनाओं को दुर्बल बना रहा है..हमारी नई पीढ़ियां कमजोर हो रही है.. संवेदनाओं से रहित ह्रदय ..हमारे महान देश के स्मष्ठि भाव को तोड़ रहा है उठो ..उठो ,प्रपंच को छोड़..यह जो आज सुबह का उजाला है खाश है.. इसमें तिरंगे की खुशबू है .. यह रोग प्रतिरोधक शक्ति से युक्त है थोड़ा जोर से सांस लो ..इस खुशबू में देश के लिए मर मिटने वाले बलिदानियों का अहसास है बहुत कुछ कहना है..पर पहले साथ में जागा करते हैं… उठ कर केवल आँखों से नहीँ ..फेफड़े को फुला.. सांस के साथ .आजादी के पर्व .की खनक लिए सुबह की रोशनी को ह्रदय तक खींच लेते हैं… आज देश के लिए मर मिटने की भावना हमारे इरादों को वज्र का बना सकता है ..आइए कितना सोओगे उठो …साथ में उठें.. एक साथ उठें आजादी और देश भक्ति का जज्बा लिए आज सुबह का यह उजाला ..जब कहीँ मुश्किलों का अँधेरा होगा काम आएगा.. इसी उम्मीद नहीं वरन दृढ़ विश्वास के साथ ..सुप्रभात..स्वतंत्रता दिवस पर अशेष बधाईयों के साथ..आपका नवीन श्रीवास्तस्व,पत्रकार💐💐

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