SC ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग पर रोक लगाने की याचिका पर करेगा सुनवाई; केंद्र से जवाब मांगा

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार से उस याचिका पर जवाब मांगा है, जिसमें सरकार को ऑनलाइन जुआ और सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म पर रोक लगाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। ये एप कथित तौर पर सोशल और ई-स्पोर्ट्स गेम की आड़ में संचालित हो रहे हैं। न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन की पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील विराग गुप्ता की दलीलें सुनीं और कहा कि वह मंगलवार को अन्य लंबित याचिकाओं के साथ इस याचिका पर भी सुनवाई करेगी। पीठ ने सरकार से याचिकाकर्ता द्वारा दी गई ‘ऑनलाइन गेमिंग एप’ के बारे में जानकारी पर कार्रवाई करने को कहा।
कोर्ट सेंटर फॉर अकाउंटेबिलिटी एंड सिस्टेमिक चेंज और शौर्य तिवारी की याचिका पर सुनवाई कर रहा, जिसमें सरकार को इन एप के प्रसार पर रोक लगाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया है कि ये ऐप पूरे देश में बड़े पैमाने पर सामाजिक और आर्थिक नुकसान पहुंचा रहे हैं। पीठ ने 4 नवंबर को सुनवाई के लिए स्थानांतरित की गई कई याचिकाओं को पहले ही सूचीबद्ध कर लिया है। ये याचिकाएं ऑनलाइन गेमिंग कानून को चुनौती देती हैं, जो ऑनलाइन मनी गेम पर रोक लगाता है और उनसे जुड़ी बैंकिंग सेवाओं और विज्ञापन पर भी रोक लगाता है।
पीठ ने 17 अक्टूबर को कहा था कि सीएएससी की याचिका एक अहम मुद्दा उठाती है और गुप्ता से याचिका की एक प्रति सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील को देने के लिए कहा। न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वकील गुप्ता से कहा था, यह एक अहम मुद्दा है। आप इसकी एक प्रति उन्हें दे दें। उन्हें इसे पढ़ने दें। वह हमारे पास वापस आएंगे।
याचिका में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी, सूचना और प्रसारण, वित्त, तथा युवा मामले और खेल मंत्रालय से यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि वे ऑनलाइन गेमिंग संवर्द्धन और विनियमन अधिनियम, 2025 और राज्य विधानसभाओं द्वारा बनाए गए कानूनों की सही व्याख्या करें, ताकि सोशल और ई-स्पोर्ट्स गेम की आड़ में चल रहे ऑनलाइन जुआ और सट्टेबाजी गेम पर रोक लगाई जा सके।
याचिका में जिन्हें प्रतिवादी बनाया गया है, उनमें चार केंद्रीय मंत्रालय तथा दो बड़ी एप स्टोर चलाने वाली कंपनियां, एप्पल इंक और गूगल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। याचिका में कहा गया है, देश के ज़्यादातर राज्यों में (ऑनलाइन) जुआ और सट्टेबाजी को गैर-कानूनी गतिविधि माना जाता है। इनका विश्लेषण करने पर पता चला है कि 65 करोड़ से ज़्यादा लोग ऐसे गेम खेल रहे हैं, जिससे इन
प्लेटफॉर्म का भारत में सालाना 1.8 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा का कारोबार हो रहा है।



