हमारे देश के तेजयुक्त उन्नत मस्तक पर ..तिलक है अंतरराष्ट्रीय योग दिवस

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर विशेष …नवीन श्रीवास्तव, पत्रकार,बस्तर

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर विशेष …नवीन श्रीवास्तव, पत्रकार,बस्तर

अंदर– भूलें नहीँ शायद आपको अनुभव नहीं पर विश्व में एक मात्र..देश है भारत..जिसके पास चित्त तक को निर्मल करने ..इंद्रियों की बुराई को निचोड़ कर निकालने अद्भुत ज्ञान है. .नीचे पढ़े🙏

योग दिवस… यह एक तरह से हमारे देश के उन्नत ललाट पर तिलक है..आखिरकार योग को विश्व मंच पर प्रतिष्ठित करने का अवसर हमें ही मिला.. अभिनदंन हो..अब देर ना हो कि इसका तिलक देश के ..युवा पीढ़ी के माथे पर लगाई जाए.. दोनों आंखों के बीच ठीक वहां जहाँ सुप्तावस्था में आज्ञा चक्र..स्थित है . वह भी इस तरह की युवा इसकी सरसराहट को महसूस कर सके..चेतन से अवचेतन और.. अचेतन तक..ताकि इस देश के इस महान योग की अदभुत शक्ति को नई पीढ़ी अपने अंदर अहसास कर कुछ कर गुजरने का संकल्प ले मुट्ठियाँ बांध खड़ा हो जाय.. जरूरत है इसी बात का यह वक्त जश्न में नाचने का ..मशगूल होने का नहीं है..हमारे साथ खास कर युवा पीढ़ी के संवेदनाओं को मरियल..कमजोर दुर्बल करने के साथ इंद्रियों के भूख बढ़ाने वाले बाजारू उत्पाद बेचने ..तिलचट्टों की तरह दलाल रोज फलफूल रहें हैं. .इससे नुकसान यह हो रहा कि हमारे ह्रदय से प्रेम करने की शक्ति कम हो रही..योग प्रेम का ही सूत्र है.आज हम टूट रहे हैं.. दिलो से दिल की दूरियां बढ़ रही है.. देश के ज्यादातर युवा कहीं अलसाई पड़ी है..कहीं आईने के सामने खुद को निहारने में लगी है तो कहीं नशे व दूसरे भरम जाल में उलझे हैं..दिखावे की सभ्यता ओढ़े हमारे बीच माँ, बहन, बेटियां छेड़छाड़, दुष्कर्म की शिकार हो रही है..समझिए यह ह्रदय हीनता है..हमारे अंदर से प्रेम भाप की तरह उड़ गायब हो रहा है..स्वामी श्री विवेकानंद जी ने इसे वर्षों पहले भांप लिया था.. इसलिए वे कहते रहे हमें चरित्र निर्माण करना है..मनुष्य बनाना है.. आज भी जरूरत इसी बात की है..योग इसके लिए एक सिद्ध हल है.. भूलें नहीँ शायद आपको अनुभव नहीं पर विश्व में एक मात्र..देश है भारत..जिसके पास चित्त तक को निर्मल करने ..इंद्रियों की बुराई को निचोड़ कर निकालने अद्भुत ज्ञान है. .पर धर्म,मजहब,जाति, ऊंच नीच की लड़ाई में हम देख ही नहीं रहे..की इस महान देश में जो विरासत के जुगनू हैं उसे छुपा दिया गया है..जरूरत है कि हम जागें.. स्वबोध का अभ्यास छूट गया ..आइये..फिर से शुरू करें अपनी जड़ों को स्मरण करें ..खुद को थोड़ा समय दें ..ईमानदारी से फिर योग स्वंय घटेगा और आप ईश्वर के साथ खुद के महान उपस्थिति को समझ सकेंगे जिसका असल उद्देश्य भी प्रेम स्वरूप योग ही है सादर अशेष बधाईयों एवं शुभकामनाओं के साथ🙏💐🙏💐

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