सर्वोच्च न्यायालय ने पेसा कानून के तहत ग्राम सभा के अधिकारों को सहीं माना, भाजपा सरकार नहीं मानती- दीपक बैज

रायपुर। छत्तीसगढ़ में पेसा कानून के अंतर्गत गांव की सीमा में प्रवेश को लेकर सर्वाेच्च न्यायालय के फैसले के संदर्भ में सरकार पर सवाल उठाते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि सर्वाेच्च न्यायालय ने पेसा कानून के तहत ग्राम सभा के अधिकार को सहीं माना है, लेकिन भाजपा सरकार की कृत्यों से स्पष्ट है कि वह नहीं मानती, पांचवी अनुसूची के क्षेत्र बस्तर और सरगुजा में जहां पर पेसा कानून लागू है, उन क्षेत्रों में बिना ग्राम सभा की सहमति के वनों की कटाई निर्बाध चालू है, कॉरपोरेट के मुनाफे के लिए जबरिया भूमि अधिग्रहण किया जा रहा है, आदिवासी अपने जल, जंगल, जमीन और पेसा कानून के प्रावधानों के सही क्रियान्वयन के लिए लगातार संघर्ष कर रहे। सरकार एक तरफ पंचायत विभाग के माध्यम से गांव में प्रवेश को लेकर पेसा के प्रावधान को लेकर तो सहमति जताती है, लेकिन संसाधनों की लूट में उन्हीं ग्राम सभा के आपत्तियों को कुचलकर उनके अधिकार छीनने का काम सरकार खुद ही कर रही है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस की सरकार के समय 8 अगस्त 2022 को छत्तीसगढ़ में पेसा कानून के नियम लागू किए गए, देवगुड़ी, घोटूल सहित तमाम धार्मिक, सांस्कृतिक संरक्षण और संवर्धन के काम हुए। भाजपा की सरकार आने के बाद ग्राम सभा की स्वायत्तता को सीमित करके कॉर्पाेरेट हितों को बढ़ावा दिया जा रहा है। सत्ता के संरक्षण में सरकारी अधिकारी नियम तोड़ रहे हैं, अनुसूचित क्षेत्र के नागरिकों के साथ संवैधानिक भेदभाव किया जा रहा है, पेसा कानून के तहत ग्राम सभा की सिफारिश अनिवार्य है लेकिन व्यावहारिक तौर पर यह सरकार इरादतन षडयंत्र पूर्वक उनके अधिकारों को दरकिनार कर रही है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि माननीय सर्वाेच्च न्यायालय ने पेसा कानून के तहत ग्राम सभाओं के फैसले को सुरक्षा प्रदान की है लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार उसी पेसा कानून के तहत आदिवासी समुदाय को प्रदत्त अधिकारों को लगातार कुचल रही है। भारतीय जनता पार्टी की सरकार आने के बाद से ही हसदेव, तमनार, धमजयगढ़, रायगढ़, मैनपाट, बैलाडीला, बचेली, किरंदुल, कांकेर, बस्तर और बीजापुर सहित बस्तर और सरगुजा संभाग में अनुसूची के क्षेत्र हैं जहां पर पेसा कानून लागू है, वहां पर भी ग्राम सभा की हजारों आपत्ति को दरकिनार करके जबरिया जंगल काटे जा रहे हैं, नए-नए खदान खोले जा रहे हैं। बेहद स्पष्ट है कि भाजपा की सरकार संवैधानिक उपबंधों को अपनी सुविधा और अपने पूंजीपति मित्रों के मुनाफे के अनुसार ही दुरुपयोग करती है। सरकार, पेसा कानून के प्रावधानों में भेदभाव बंद कर उचित क्रियान्वयन करे।



