FEATURED

खाद्यान्न भ्रष्टाचार,उद्योगपतियों को 45% सब्सिडी बाढ़ पीड़ित के पुनर्वास को लेकर मुक्ति मोर्चा एक्शन में

 

 

बस्तर बेटा नवनीत पहुंचे कलेक्ट्रेट सोपे ज्ञापन कहा सारे विषय संवेदनशील और गंभीर है चुप रहना असहनीय, बन सकता है जन आंदोलन

 

 

जगदलपुर।खाद्यान्न घोटाले, बाढ़ पीड़ितों के हक एवं सरकारी नीतियों की असमानता पर उच्चस्तरीय जांच एवं ठोस कार्यवाही जैसे मांगों को लेकर जनता कांग्रेस के संभागीय अध्यक्ष एवं बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा के प्रमुख संयोजक श्री नवनीत चांद आज पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं के साथके साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे जहां उन्होंने उक्त समस्याओं एवं विसंगतियों को लेकर चर्चा के साथ कलेक्टर के माध्यम से माननीय राज्यपाल तथा मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा उन्होंने विश्वास जताया कि इन गंभीर विषयों को लेकर शीघ्र अपेक्षित कार्यवाही की जाएगी बस्तर बेटा ने कहा कि हमारी मांगे गंभीर और संवेदनशील मुद्दों को लेकर है जिसे लेकर चुप नहीं रहा जा सकता।

 

श्री नवनीत ने कहा कि हाल ही में प्राप्त समाचार एवं विभागीय रिपोर्टों से यह तथ्य हृदय विदारक रूप से स्पष्ट हुआ है कि करोड़ों रुपये का खाद्यान्न घोटाला एवं अन्य गंभीर अनियमितताएँ उजागर हुई हैं ,यह न केवल जनता के भोजन के अधिकार पर सीधा प्रहार है, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 21 में निहित जीवन एवं खाद्य सुरक्षा के अधिकार का भी घोर उल्लंघन है।

 

मुक्ति मोर्चा के संयोजक अपनी मांगों में कहा कि बस्तर में बाढ़ और प्राकृतिक आपदा से पूर्णत: क्षतिग्रस्त मकानों की संख्या 103 है, जिनके लिए मात्र ₹1.29 करोड़ की राशि जारी की गई है। इसका अर्थ है कि प्रत्येक प्रभावित परिवार को केवल ₹1,25,000 की राहत राशि दी गई है। यह अत्यंत अपर्याप्त है, क्योंकि प्राकृतिक आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत केवल राहत राशि ही नहीं, बल्कि पुनर्वास पैकेज प्रदान किए जाने का स्पष्ट प्रावधान है।वहीं उन्होंने उक्त विषय को लेकर अपनी मांगों के संदर्भ में अपनी सुझाव और खाद्यान्न भ्रष्टाचार बाढ़ पीड़ित, सरकारी नीति एवं व्यवस्था को लेकर अपनी बातें भी जिम्मेदारी के साथ स्पष्ट किया है जो निम्नलिखित है: –

 

 

 

 

1. खाद्यान्न एवं राशन घोटाले पर सख्त कार्रवाई

 

नागरिक आपूर्ति निगम, जिला वेयरहाउस, खाद्य विभाग, परिवहन ठेकेदारों, राशन दुकान संचालकों तथा राइस मिलर्स सभी की भूमिका इस घोटाले में संदिग्ध प्रतीत होती है।

 

* 480 क्विंटल से अधिक अनाज का गायब होना केवल आर्थिक अपराध नहीं बल्कि जनता के हक पर खुला डाका है।

* इस पूरे प्रकरण की कलेक्टर-स्तरीय उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की जाए,

* सभी संबंधित अधिकारियों, मिलर्स, ठेकेदारों एवं परिवहनकर्ताओं के खिलाफ FIR दर्ज कर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

* जिन राशन दुकानों पर गड़बड़ी पाई गई है उन्हें तत्काल निलंबित किया जाए।

 

 

2. बाढ़ पीड़ितों और मूल निवासियों के हक की बहाली विषय में –

 

* प्रभावित परिवारों को केवल राहत राशि न देकर पुनर्वास पैकेज भी उपलब्ध कराया जाए।

* आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अनुसार पुनर्वास पैकेज केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आवास का पुनर्निर्माण, आजीविका की बहाली, और सार्वजनिक सेवाओं (जल, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता) की पुनर्स्थापना भी शामिल है।

* प्रत्येक प्रभावित परिवार को कम से कम ₹5 लाख की सहायता राशि प्रदान कर स्थायी आवास उपलब्ध कराया जाए।

* मुआवजा वितरण की प्रक्रिया पारदर्शी बनाई जाए और सभी लाभार्थियों की सूची सार्वजनिक की जाए।

* सबसे गंभीर प्रश्न यह है कि सरकार के पास बस्तर के मूल निवासियों और आदिवासियों के लिए पर्याप्त धन नहीं है, परंतु बड़े-बड़े उद्योगपतियों और होटल बनाने वालों को 45% तक सब्सिडी दी जा रही है। क्या यह बस्तर के लोगों के साथ घोर अन्याय नहीं है?

 

 

3. आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत पुनर्वास पैकेज लागू करने की अनिवार्यता

 

1. यह अधिनियम स्पष्ट करता है कि पुनर्वास पैकेज एक समग्र सहायता है, जिसमें –

 

* क्षतिग्रस्त मकानों की मरम्मत/नए निर्माण हेतु वित्तीय मदद,

* प्रभावित परिवारों को नकद व आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति,

* किसानों, पशुपालकों व व्यवसायियों की आजीविका बहाली,

* तथा शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल व स्वच्छता जैसी सार्वजनिक सेवाओं की पुनर्बहाली शामिल है।

 

2. यह पैकेज केवल अल्पकालिक राहत तक सीमित नहीं, बल्कि दीर्घकालिक पुनर्वास और समुदाय को भविष्य की आपदाओं के प्रति सक्षम बनाने का उद्देश्य भी रखता है। अतः प्रशासन को चाहिए कि इस प्रावधान को लागू कर बस्तर के पीड़ित परिवारों को राहत + पुनर्वास दोनों पैकेज तत्काल प्रदान करे।

 

 

 

4. सरकारी नीतियों में भेदभाव समाप्त हो एवं सामाजिक न्याय की बहाली

 

* पूंजीपतियों को दी जाने वाली अनावश्यक सब्सिडियों की समीक्षा कर, प्राथमिकता गरीबों एवं पीड़ितों को दी जाए।

* होटल एवं व्यावसायिक परियोजनाओं में कम से कम 50% रोजगार स्थानीय युवाओं के लिए आरक्षित किया जाए। इस दौरान बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जे के पदाधिकारी के रूप में प्रिया यादव, गायत्री ठाकुर, निहारिका सिंह, अलका नादान, रमेश कश्यप, चैतराम, कमल बघेल, नीलांबर भद्रे, जॉन आकाश, शंकर कश्यप,नोबी निशाद ,मेहताब सिंह, फुटपाथ व्यापारी संघ के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित थे!

Related Articles

Back to top button