कुछ कर कर गुजरने के जज्बे और हौसले ने बनाया उसे बस्तर बेटा…

सेवा से शुरुवात, विश्वास और कड़ी परिश्रम से बनी बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा की बस्तर में पहचान
0 जनता दरबार में लगने लगा है दरबार!.. अपनी शिकायतों और समस्याओं की अर्जी लेकर बस्तर के हर हिस्से से लोग पहुंच रहे हैं ..जनता दरबार
नवीन श्रीवास्तव, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक।
एक नाम इन दिनों बड़े विश्वास के साथ लोगों के जुबान से होकर किसी के दिल तो.. किसी दिमाग में जगह बनाते जा रहा है .. बस्तर ही नहीं खबर है कि प्रदेश की राजधानी में यह नाम चर्चे में है … चौतरफा चर्चे में यह है कि सत्ता में नहीं है होने के बाद भी..बस्तर के हितों के लिए…रोज,रोज लड़ने का विश्वास जुटाने वाला यह कौन है… दरअसल जिस शख़्स की हम बात कर रहे हैं वह किसी नाम के मोहताज नहीं है …वह है श्रेष्ठ बस्तर निर्माण का संकल्प लेकर… बस्तर में जल,जंगल, जमीन के साथ यहां के युवा , ग्रामीण ,आदिवासियों के साथ खड़े होकर हर मोर्चे पर लड़ते दिखने वाला…बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा के प्रमुख संयोजक श्री नवनीत चांद एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जे पार्टी के संभागीय अध्यक्ष… मीडिया के साथ उनके जिद और जुनून को जानने वाले उन्हें बस्तर बेटा भी कहते हैं ।
देखिए जरा..उनके निवास जनता दरबार को लेकर अखबार की सुर्खियां बनती है कि ..”श्रेष्ठ बस्तर निर्माण करने जनता दरबार में बना रोड मैप” इस पर आगे नवनीत स्पष्ट करते हैं कि हमें राजनीति नहीं लोगों के लिए काम करना है..!
बस्तर जो राजनीतिक गतिविधियों एवं व्यवस्था के अन्य गहमा – गहमी को लेकर छत्तीसगढ़ में दूसरी राजधानी है …वहां मीडिया में सुर्खियों से लेकर मैदानी स्तर पर बस्तर के लोगों की आवाज बनना कितना कठिन है …इस विषय में समीक्षको का कहना है कि यह सब एक दिन में नहीं होता.. एक तरह के वैकल्पिक तलाश और शून्यता के बीच यह सब होता है खासकर तब जब.. जनप्रतिनिधि और आम जनता के माने और समझे जाने वाले तमाम नेताओं के इर्द-गिर्द चारण – भाट जैसे लोगों की भीड़ बढ़ती है ..और आम लोगों के समस्याओं को हल करने के बजाय तालियां बजाने वालों के बीच जब जिम्मेदार जनप्रतिनिधि और नेता खुश रहने लगते हैं .. तब आम जनता अपने समस्याओं को लेकर अपने में मस्त भीड़ से घिरे अपने नेता तक पहुंच नहीं पाती …यह समय होता है की कोई आम जनता के लिए लड़कर हीरो बन जाए …एक नायक उठकर खड़ा हो जाए .. पर यह आसान नहीं होता बहुत ही परिश्रम, इच्छा शक्ति और योजना के बिना कोई नायक नहीं बनता.. समीक्षकों की माने तो ऐसे ही शून्यता के समय नवनीत चांद पूरे इरादों के साथ मजबूत हौसला ले उतरे और.. जरूरतमंद और समस्याओं से घिरे अपने छोटे-छोटे ,बड़े-बड़े दुख के साथ जी रहे आम जनता,ग्रामीण आदिवासियों तक ,शहर के हर एक मोहल्ले, वार्ड से गांव-गांव तक पहुंचे .. और उनकी समस्याओं को हल करने का ईमानदारी और परिश्रम पूर्वक प्रयास किया … काफिला बढ़ता गया.. उन्होंने कुछ कर गुजरने वाले युवा को अपने से जोड़ा . और उनकी निरंतर सक्रियता लोगों के दिलों में उतरता चला गया …वर्तमान में जगदलपुर शहर के ठीक मध्य हिस्से में स्थित उनका निवास स्थान “जनता दरबार” में अब आए दिन अपनी समस्याओं को लेकर दूर – दराज से अपनी अर्जी और दुखड़े के साथ पहुंचने वाले लोगों को देखकर यह आसानी से समझा जा सकता है कि उनके नेतृत्व को लेकर बस्तर में लोगों के बीच उन्हें लेकर विश्वास मजबूत होने लगा है !
साफ है कि एक दिशा में योजना बनाकर लगन से कुछ किया जाए तो परिणाम आता ही है।
जानकारों की माने तो बस्तर की दशा और दिशा तय करने वालों की अग्रिम पंक्ति पर रहने वाले भी आजकल उन्हें गंभीरता से लेने लगे हैं.. श्रेष्ठ बस्तर निर्माण के साथ बस्तर में विकास, रोजगार, किसानों, ग्रामीण आदिवासियों के साथ विकसित बस्तर को लेकर वायुमार्ग के साथ, रेल और सड़क कनेक्टिविटी, उद्योग, उच्च शिक्षा बेहतर प्रबंधन को लेकर उनका अपना स्पष्ट नजरिया भी दिखता है और तर्क भी .. योजनाओं पर अमल से पहले गंभीर मनन.. होमवर्क नवनीत को उन्हें युवा नेताओं के बीच जहां अलग जगह देता है वहीं अब बस्तर में कुछ कर गुजरने वाले युवा उनसे ..बहुत कुछ रोज सीख रहें हैं .. मौका मिलने पर नवनीत हर क्षेत्र के प्रमुख के साथ , हर तरह के मंच पर अपनी बात रखने से पीछे नहीं हटते .. वह बस्तर के शहरी क्षेत्र के लोगों के साथ और इसके साथ ही, दूरस्थ गांव के ग्रामीण, आदिवासियों के साथ उनके समस्याओं को हल करने उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर जिम्मेदार लोगों से सवाल जवाब करते नजर आ जाते हैं..बस्तर के विकास और समृद्धि के साथ अधिकार को लेकर सभी मुद्दों को लेकर जितनी मजबूती से वह अपनी बात रखते हैं यह उन्हें उतना ही मजबूत बनाता है।
गांव – गांव, चौपाल हो या किसी तरह का प्रदर्शन हो घेराव या मांगो को लेकर धरना बस्तर हक को लेकर बुलंद होते उनके नेतृत्व में बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा की बुलंद होती आवाज में आम लोगों की बढ़ती संख्या देखकर राजनीति से जुड़े जानकार भी अब पूछते हैं कि क्या मुक्ति मोर्चा के साथ बस्तर में जनता कांग्रेस के नेतृत्व करने वाले नवनीत विपक्ष की भूमिका नहीं निभा रहे?
एक शाश्वत तथ्य तो यह है कि परिश्रम के अनुपात में ही समय पुरस्कार देता है..पर बस्तर में नवनीत के नेतृत्व में बढ़ते मुक्ति मोर्चा और जनता कांग्रेस का काफिला अब इस तरह चल पड़ा हैं.. कुछ कर गुजरने के हौसले लिए इस काफिले का संघर्ष को अब बस्तर अपने समय के पन्नों में इस संघर्ष को दर्ज करने लगा है ..वह समय ही है जो किसी के परिश्रम को व्यर्थ नहीं जाने देता.. अगर आपकी नीयत साफ है और उसके कसौटी पर खरे हैं..तो वह पुरस्कार भी जरूर देता है !




