बस्तर को महसूस कीजिए.. यह वही बस्तर है जहां नंगे पैरों के धमक से पथरीले पहाड़ों में पगडंडियां बन जाती है..

बेबाक अनकही कहानियां/ चर्चा- ए -चौराहा :चांदनी चौक (किश्त- 14)

नवीन श्रीवास्तव लेखक एवं पत्रकार,बस्तर

नवीन श्रीवास्तव लेखक एवं पत्रकार,बस्तर

विशेष:- चर्चा-ए-चौराहा:चाँदनी चौक स्तम्भ को ना केवल बस्तर बल्कि समूचे छत्तीसगढ़ से मिल रही प्रबुद्ध प्रतिक्रिया,सराहना और हौसला बढ़ाने आप सभी पाठकों को ह्रदय से धन्यवाद..साधुवाद ..

आरंभ -बस्तर सहज जीवन के लिए संजीवनी है शायद यही कारण है कि सियासी पार्टियों के फेफड़ों में भी जब आक्सीजन की कमी होती है वे इधर का रुख करते हैं.. खैर गत दिवस राहुल गांधी का रायपुर आना हुआ उनके आने पर प्रदेश के राजधानी में भी बस्तर और बस्तरिया पन प्रासंगिक रहा ..चर्चे में रहा ..जाहिर है उनके आने के साथ राजनीतिक गर्मी का पारा भी बढ़ना था .अक्सर ऐसे समय में कोई उचक उचक के किसी कद को नापते हैं .. तो कोई जरूरत से ज्यादा झुक -झुक कर ..राजनीति में भले कद का अपना नफा नुकसान हो पर जब बात बस्तर की होती है तो मेरे ख्याल से दिखने -दिखाने के बजाय यहाँ जंगलों के हरे पेडों के साथ जीवन मे हरियाली बांटने वाले बस्तर के जड़ो की बात होनी चाहिए..भूलिए नहीं मेरे साथ बस्तर को महसूस कीजिए यह वही बस्तर है जहां नंगे पैरों के धमक से पथरीले पहाड़ों में पगडंडियां बन जाती है..अगर यह सब याद दिलाता रहूं तो यह खत्म नहीं होने वाला.. पर बस्तर की बात करो तो हमेशा याद रखो .. महत्वाकांक्षा की राजनीति निषेध रहे..जीवन की जड़ें कैसे गहरे हो ..धरती में सहजता के साथ संवेदनाओं को सहेजने की हो.. देखिये बस्तर जगदलपुर में स्वास्थ्य सुविधाओं को जो कोरोना जैसे संक्रमण काल में गम्भीर असुविधाओं के दौर से गुजर रहा..ऊपर से अदूरदर्शिता के चलते डीएमएफटी तहत लेकर कार्य करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों का भविष्य और सेवाएं दोनों व्यवस्था के लिए गले की हड्डी कैसे और क्यों बन गई है .!इसका स्थायी निदान हुआ.. महती आवास की योजना गरीबों तक पहुँचने से पहले ही सवालों को लेकर हवा में क्यों है .. शिक्षा, पर्यावरण स्वच्छता …बहुत सी बातें है चर्चा है समूचे बस्तर सहित
चौराहों के इस शहर में .. पर जिस बस्तर को प्राकृतिक सौंदर्य के सपनों ने खुद अपने लिये चुना है..वहां के रहने वाले लोगों से बेहतर जीवन के लिए सपने सजोने का अधिकार कैसे छीना जा सकता है .. व्यवस्था पर बैठे जो जाने अनजाने में अव्यवस्था और विसंगतियों को फैला रहे ऐसे ..उद्दंड भरे पेट वालों को समय रहते यह समझना होगा..(जारी)

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