जानिए खुफिया मिशन की पूरी दास्तान, सीआईए ने कैसे की अल जवाहिरी की पहचान?

अल कायदा नेता अयमान अल जवाहिरी के मारे जाने से इस आतंकी संगठन को बड़ा झटका लगा है। हालांकि इस आतंकी को ढूंढना, उसकी पुख्ता पहचान करना और फिर उसे मारना इतना भी आसान नहीं था। वह पिछले कई साल से छुपता फिर रहा था। अमेरिकी अफसरों के मुताबिक जवाहिरी को खत्म करने का मिशन सावधानी, धैर्य और दृढ़ता का नतीजा था। असल में बीते कुछ साल में जवाहिरी के मरने और जिंदा होने की खबरें इतनी बार आ चुकी थीं कि अमेरिका इस बार कोई रिस्क नहीं लेना चाहता था। इसलिए इस मिशन का एक-एक कदम फूंक-फूंककर रखा जा रहा था। एक अमेरिकी अफसर ने अपना नाम न जाहिर करने की शर्त पर इस खुफिया मिशन की अंदरूनी जानकारी दी।

कई साल से थी नजर
इस अधिकारी के मुताबिक बीते कई साल से अमेरिकी सरकार इस बात से वाकिफ थी कि जवाहिरी को कैसे मदद और समर्थन मिल रहा है। अफगानिस्तान छोड़कर जाने के बाद अमेरिकी अधिकारी इस मुल्क में अलकायदा की मौजूदगी पर निगाह रखे हुए थे। इस साल अधिकारियों को जानकारी हुई कि जवाहिरी का परिवार-जिसमें उसकी पत्नी, उसकी बेटी और बेटी के बच्चे शामिल थे, काबुल के एक सेफहाउस में पहुंचे हैं। ठीक इसी जगह पर जवाहिरी भी देखा गया। इसके बाद अमेरिकी अधिकारी निगरानी में जुटे हुए थे। अब अधिकारी जवाहिरी की पहचान पुख्ता करने में जुट गए थे। सभी चाहते थे कि इस बार पूरी तरह कंफर्म हो जाए कि सेफहाउस में रहने वाला शख्स अयमान अल जवाहिरी ही है। अप्रैल की शुरुआत में इस बारे में अमेरिका में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को इस बारे में जानकारी दी गई। इसके बाद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवान ने राष्ट्रपति जो बाइडेन को इस बारे में ब्रीफ किया।

सेफहाउस की बनावट के बारे में भी जुटाई गई जानकारी
अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक अलग-अलग स्रोतों से मिली सूचनाओं के आधार पर वहां जवाहिरी की मौजूदगी के बारे में पुष्टि की जा रही थी। काबुल सेफहाउस में जवाहिरी के पहुंचने के बाद अधिकारी और चौकन्ने हो गए। इसके बाद उसे कई बार बालकनी पर देखा गया। इसके बाद शुरू हुई ऑपरेशन की तैयारी। इसके लिए सेफहाउस की बनावट और वहां रहने वालों के बारे में पूरी जानकारी जुटाई गई। अमेरिका चाहता था कि इस ऑपरेशन के दौरान स्थानीय लोगों, जवाहिरी की फैमिली यहां तक कि सेफहाउस को भी कोई नुकसान न पहुंचे। इसलिए बहुत पुख्ता ढंग से इस ऑपरेशन की तैयारी की गई। इसको लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति की अहम सुरक्षा अधिकारियों और कैबिनेट सदस्यों से मीटिंग हुई। एक जुलाई को बाइडेन को व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में एक प्रस्तावित हमले के बारे में जानकारी दी गई। उन्हें यह जानकारी उनके कैबिनेट के साथियों और सीआईए डायरेक्टर विलियम बर्न्स ने दी।

25 जुलाई को फाइनल मीटिंग
इस दौरान बाइडेन ने पूछा कि यह जानकारियां कैसे और किसके जरिए मिली हैं। साथ ही उन्होंने इंटेलीजेंस कम्यूनिटी द्वारा मीटिंग में लाए गए सेफहाउस के मॉडल का बारीकी से मुआयना भी किया। उन्होंने बिजली, मौसम, कंस्ट्रक्शन मैटीरियल संबंधी उन पहलुओं पर गहराई से सवाल पूछे जो इस मिशन में बाधा बन सकते थे। इसके बाद 25 जुलाई को राष्ट्रपति बाइडेन ने फाइनल ब्रीफिंग के लिए अहम कैबिनेट सदस्यों और सलाहकारों की एक बैठक बुलाई। इसमें तमाम अन्य मुद्दों के साथ इस बात पर भी चर्चा की गई कि जवाहिरी के मारे जाने से अमेरिका और तालिबान के संबंधों पर क्या असर पड़ेगा? सभी दलीलों से संतुष्ट होने के बाद राष्ट्रपति ने ऑपरेशन को अंजाम तक पहुंचाने की सहमति दी और साथ ही ताकीद किया इस दौरान आम जनहानि न होने पाए। आखिर 30 जुलाई को रात 09.48 बजे ड्रोन फायरिंग के जरिए जवाहिरी का अंत हो गया।

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