हाई कोर्ट ने सोचने की सलाह दे उठाए सवाल

नई दिल्ली. मनी लॉन्ड्रिंग केस में बंद दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन को मंत्री पद से हटाने की मांग को लेकर दायर की गई याचिका को खारिज करते हुए हाई कोर्ट ने इसे अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया है। हाई कोर्ट ने कहा कि इस पर मुख्यमंत्री को विचार करना होगा। कोर्ट ने कहा कि यह काम मुख्यमंत्री का है कि जनता के हित में सही फैसला करें और विचार करें कि क्या एक आपराधिक पृष्ठभूमि या नैतिक पत्तन के आरोपी को नियुक्त किया जाए और मंत्री के पद पर बरकरार रखा जाए या नहीं।

लाइव लॉ के मुताबिक, हाई कोर्ट ने कहा कि कोर्ट का काम मुख्यमंत्री को निर्देश देना नहीं है, लेकिन यह कर्तव्य है कि अहम पदों पर बैठे लोगों को हमारे संविधान के सिद्धांतों को कायम रखने में उनकी भूमिका की याद दिलाई जाए। कोर्ट ने आगे कहा कि मुख्यमंत्री कैबिनेट के सदस्यों के चुनाव और मंत्रिपरिषद की नियुक्ति को लेकर नीति बनाने के लिए अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल करते हैं।

भाजपा नेता और पूर्व विधायक नंद किशोर गर्ग ने कोर्ट में याचिका दाखिल कर सत्येंद्र जैन को मंत्रीमंडल से हटाने की मांग की थी। मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने इस याचिका को खारिज कर दिया। भाजपा नेता गर्ग ने याचिका में कहा था कि संवैधानिक शपथ लेने के चलते जैन एक लोक सेवक हैं। जैन धन शोधन जैसे अपराध के आरोप में जेल में बंद होने के बावजूद एक मंत्री को मिलने वाले विशेषाधिकार और सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं।

इससे पहले 7 जुलाई को भी कोर्ट ने जैन को उनके पद से हटाने का आदेश देने से इनकार कर दिया था। न्यायालय ने कहा था कि ‘हमें अपनी सीमाएं पता हैं। हमें कानूनों, नियमों और अधिसूचनाओं का पालन करना होगा। हम इससे आगे नहीं जा सकते। हम कानून बनाने वाले नहीं हैं।” गिरफ्तारी के बाद जैन न्यायिक हिरासत में लोक नायक जयप्रकाश अस्पताल में इलाज करा रहे हैं।

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