बस्तर के आराध्य देवी मां दंतेश्वरी मांई जी की देव कोठार जमीन दिनदहाड़े तार फेंसिंग कर कब्जा जिला प्रशासन बेखबर व मौंन –संजय पंत

दंतेवाड़ा ।सामाजिक कार्यकर्ता संजय पंत ने प्रेस नोट जारी कर कहा कि बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी मांई जी की देव कोठार जमीन को दिनदहाड़े तार फेंसिंग कर कब्जा किया किया जाना जिला प्रशासन को जानकारी ना होना दुर्भाग्य की बात है। जबकि छत्तीसगढ़ शासन में बस्तर प्रभारी मंत्री माननीय श्री कवासी लखमा जीके द्वारा दंतेवाड़ा प्रशासन को आदेश कर चुके हैं कि बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी मांई जी की देवकोठार एवं मांई जीके अन्य जमीनों को संरक्षित क्या जाए करके उसके बावजूद भी खुलेआम दिनदहाड़े कब्जा कर रहे है जिला प्रशासन बेखबर व मौन है।जब शहर के बीचोबीच मांई जी की देव कोठार जमीन को बचा नहीं पा रहे हैं तो आदिकाल से बसे मूल निवासियों का जल जंगल जमीन व खनिजों को बचाने का राग अलापना बैमानी होगी। संजय पंत ने यह भी कहा कि दंतेवाड़ा जिला के,144 , ग्राम पंचायतों से देवी देवता लाने वाले समाज के लोगों को रुकने ठहरने के लिए बड़ा सा सेट बनवा कर सुविधा मुहैया करवाना था और देवकोठार जमीन को देवी देवताओं के लिए संरक्षित करने के लिए सर्व मूल समाज एवं दंतेश्वरी माई जी के पुजारी सेवादार टेंपल कमेटी के सभी लोग मिलकर माई जी के जमीन को संरक्षित किया जाए करके शासन प्रशासन से आवेदन निवेदन करते हुए प्रयासरत हैं। जब माई जी के जमीन को हड़पने में कोई कोर कसर लोग छोड़ना नहीं चाह रहे हैं। तो सोचने वाली बात है।की साधारण सा मूल समाज के लोगों का जल जंगल जमीन खनिजों को कैसे बचाया जा सकता है।
राजनीतिक पार्टियों के स्थानीय जनप्रतिनिधि। समाज व जल जंगल जमीन खनिजों को रक्षित सुरक्षित करने के प्रति जागरूक ना होना मूल समाज के लिए दुर्भाग्य की बात है। सभी राजनीतिक पार्टियों में हमारे
मुल लोग ही नीचे से लेकर ऊपर तक जनप्रतिनिधि नेता
सर्व समाज के द्वारा चुने जाते हैं। या चुने गए हैं सभी संवैधानिक पदों पर मूल समाज के लोग आसीन होते हुए भी आदिकाल से बसे मूल निवासियों का जल जंगल जमीन खनिजों को बचा नहीं पाना व समाज को अपने हक अधिकार पाने के लिए न्याय प्राप्त करने के लिए दर-दर के ठोकरें खाना पढ़ रहा हो दर-दर भटकना पड़ रहा हो। तो सोचने में
जनता को मजबूर होना पड़ता है। की जिनको जनता ने अपनी कीमती वोट देकर
संवेधानिक पदों पर जिस कुर्सी पर बैठाया गया है उस पद को समझ नहीं पारहे हैं ।क्या जनताअपने कीमती वोट देकर जनता को पछता ना पढ़ रहा है।
जनता अब जाग चुकी है। जनता सही गलत को समझ रही है। संजय पंत ने यह भी कहा कि जब दंतेश्वरी मांई जी की जमीन शहर के बीचो बीच सुरक्षित नहीं है तो सोचने वाली बात यह है की।सर्व समाज व समाज के जल जंगल जमीन खनिजों को
बचाने के बारे में जनता के सामने चुनाव के समय लंबा भाषण बड़े-बड़े वादे व राग अलापना जनहित व समाज हित में नहीं।

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