जनता कांग्रेस के अशासकीय संकल्प के दबाव में, कांग्रेस ने लाया शासकीय संकल्प का प्रस्ताव के दबाव में, कांग्रेस ने लाया शासकीय संकल्प का प्रस्ताव

नगरनार निजीकरण की लड़ाई सड़क से विधानसभा तक पहुंचा
जगदलपुर। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के प्रदेशाध्यक्ष अमित जोगी ने बस्तर प्रवास के दौरान घोषणा की थी कि नगरनार के निजीकरण के खिलाफ शीतकालीन सत्र में अशासकीय संकल्प पत्र लाया जायेगा, इसके बाद से राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गयी थी, क्योकि राज्य में कांग्रेस की सरकार है, और नगरनार निजीकरण के मुद्दे पर ही विधानसभा चुनाव लड़ा था जिसका फायदा भी हुआ, और बस्तर से भाजपा का सुपड़ा ही साफ हो गया, वही कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष मोहन मरकाम ने भी विधानसभा में निजीकरण का प्रस्ताव लाने की बात कही थी लेकिन तारीख की घोषणा नही करने से सस्पेंस बना था। अमित जोगी के बस्तर प्रवास में निजीकरण के खिलाफ अशासयकी संकल्प पत्र लाने की घोषणा के बाद राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी पर दबाव बढ़ गया कि सरकार में होने के बाद वह क्यो निजीकरण के खिलाफ शासकीय संकल्प पत्र नही ला रही है। शीतकालीन सत्र में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री कवासी लखमा ने निजीकरण के खिलाफ शासकीय संकल्प पत्र लाया गया, जिस पर चर्चा सोमवार हो होगी लेकिन जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के प्रदेशाध्यक्ष अमित जोगी बस्तर प्रवास के दौरान अशासकीय सकंल्प पत्र लाने की घोषणा के बाद से ही यह सवाल गहराने लगा था कि कांगेे्रस जो निजीकरण का खूल कर विरोध कर रही है वह निजीकरण के खिलाफ कृषि बिल की तरह प्रस्ताव क्यो नही लाती है। गौरतलब है कि आदिवासी समाज के लोगों ने भी यह सवाल उठाया था कि जब राज्य सरकार कृषि बिल पर विशेष सत्र बूला सकती है, उसी सत्र में नगरनार निजीकरण के खिलाफ भी प्रस्ताव क्यो नही लाया गया। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अमित जोगी ने बस्तर प्रस्ताव के दौरान अशासकीय संकल्प पत्र लाने का जो दवाब सरकार पर बनाया था, उसके चलते सरकार को शीतकालीन सत्र में आनन फानन निजीकरण के खिलाफ शासकीय संकल्प का प्रस्ताव लाने को मजबूर होना पड़ा। गौरतलब है कि प्रदेशाध्यक्ष मोहन मरकाम ने भी निजीकरण का विरोध कर रही जनता को यह विश्वास दिलाया था कि विधानसभा में प्रस्ताव लाया जायेगा लेकिन शाीतकालीन सत्र में यह प्रस्ताव कांग्रेस पार्टी लायेगी इसका उल्लेख नही किया गया था।

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