मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने RSS पर फिर साधा निशाना, “संघ का बैंड और हाफ पैंट हिटलर से प्रेरित

 

 

 

 

“गंगाजल का मसला शराबबंदी से नही.. किसानों की क़र्ज़ माफ़ी से जूड़ा था”

रायपुर।मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने एक बार फिर संघ याने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ पर निशाना साधा है। विधानसभा कैंपस में चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने संघ के गणवेश और शोभायात्रा में बजने वाले ड्रम का जिक्र करते हुए इसे हिटलर से जोड़ा है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल मौजुदा समय में कांग्रेस की ओर से शीर्ष नेतृत्व के बाद शायद पहले ऐसे शख़्स हैं जो संघ और मोदी दोनों को लगातार निशाने पर ले रहे हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के शब्द भले सामान्य हैं लेकिन उससे उपजने वाले भाव संघ और उसके स्वयंसेवकों को आहत कर सकते हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने संघ को लेकर कहा –

“संघ और हिटलर के रिश्ते छूपे हुए नही हैं, इनके लोग हिटलर से मिले हैं,और हिटलर के प्रशंसक रहे हैं.. संघ का गणवेश और उनका बैंड भी हिटलर से ही प्रेरित है” भूपेश बघेल का संघ पर यह पहला बयान नही है। मुख्यमंत्री बघेल इसके पहले भी संघ को निशाने पर लेने की वजह से चर्चाओं में रहे हैं । मुख्यमंत्री बघेल के निशाने पर आज यदि संघ आया तो इसका तात्कालिक संदर्भ विधानसभा के भीतर से जुड़ता है। अनुपुरक बजट पर चर्चा के दौरान विपक्षी दल भाजपा ने एक बार फिर सदन में कहा –

“गंगाजल लेकर शराबबंदी की बात की गई लेकिन सभी जानते हैं शराबबंदी का क्या हुआ”

उल्लेखनीय है भाजपा हर मुमकिन मौक़े पर बेहद तल्ख तरीक़े से शराबबंदी लगे वादे को गंगाजल से जोड़ती है, और इसे वायदा खिलाफी के साथ साथ गंगा जल का अपमान बताने से नही चुकती। देर शाम जबकि सदन के नेता के रुप में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जवाब देना शुरु किया तब उन्होने कहा –

“यह लोग गोएबल्स की उस नीति पर चलते हैं जिसमें यह कहा जाता है कि किसी झूठ को सौ बार बोलो तो वह सच हो जाता है, गंगाजल को शराबबंदी से गलत जोड़ा गया, यह विषय तो क़र्ज़ माफ़ी से जूड़ा था,और यह परिस्थितियाँ भी निर्मित तब हुई जबकि एक फर्जी पत्र वायरल कराया गया जिसमें यह लिखा था कि, कर्जा माफ़ी नही होगी, भरोसा दिलाने के लिए हमने गंगाजल लेकर क़सम खाई कि, सत्ता हासिल होने के दस दिन के भीतर क़र्ज़ा माफ़ी करेंगे, लेकिन इसे शराब बंदी से जोड़ा जाता है”

जिस फर्जी पत्र के वायरल होने की बात मुख्यमंत्री बघेल बता रहे थे, दरअसल वह पत्र कथित रुप से तत्कालीन मीडिया सेल प्रभारी शैलेष नितिन त्रिवेदी और तत्कालीन प्रदेश महामंत्री गिरीश देवांगन के नाम से जारी कर मीडिया ग्रुपों में वायरल किया गया था, उस पत्र में उल्लेखित था कि, धान बोनस और क़र्ज़ा माफ़ी नही होगी। जितनी तेज़ी से यह पत्र वायरल हुआ उतनी ही तेज़ी से खंडन भी किया गया था। तब यह ख़बरें भी आई कि, फर्जी पत्र की शिकायत भी की गई है। यह पत्र चुनाव को प्रभावित करने वाला माना गया क्योंकि कांग्रेस जिन अहम मुद्दों के आधार पर सरकार बना पाई उसमें क़र्ज़ा माफ़ी और धान बोनस था।

यह याद रखा जाना चाहिए भूपेश बघेल ने सरकार पर नियंत्रण पाने के दो घंटे के भीतर क़र्ज़ा माफ़ी को प्रभावी किया और धान बोनस के लिए आने वाले समय में पृथक से नीति बनाई गई।मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जब सदन से बाहर निकले तो ज़ाहिर है यह सवाल होना ही था कि आखिर क्यों गोएबल्स याद आया, जवाब में मुख्यमंत्री बघेल ने अपनी बात तो रखी ही साथ ही एक बार फिर संघ को निशाने पर ले लिया।

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