क्या आईना भी आंखे बंद कर देखते हो..। शहर के अखबार में तुम्हारी तस्वीर छपी है।। स्थानीय निगम और जिम्मेदार प्रशासन के साथ जनप्रतिनिधि की उदासीनता से शराब के अड्डे में तब्दील व्यवसायिक परिसर..

 

जगदलपुर ।बस्तर के साथ खुद को जगदलपुर का हितैषी कहने वाले जनप्रतिनिधियों नेताओं और समाजसेवियों की कमी नहीं है जो गले में मैं फलाने मैं ढें काने..मैं अमका.. का पोस्टर टांगे फिरते हैं पर यह इस खबर को लिखे जाते वक्त तक की मौजूदा तस्वीर देखिए ..धीरे धीरे विसंगतियों को बुराई और अव्यवस्था से नासूर बनने देने वाले नकारेपन की ऐसी तस्वीर.. आपने कभी नहीं देखी होगी …यह तस्वीर है जगदलपुर की स्थित चांदनी चौक से कुछ दूर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय व्यावसायिक परिसर का जो लंबे समय से नशाखोरी का अड्डा बना हुआ है ..जिसे लेकर समय-समय पर खबरें सामने आते रहती ।

शराब के नशे में डूब कर आवारगी की यह तस्वीर … कथनी करनी में फर्क रखने वाले उन नेताओं के गाल में तमाचे की भी तस्वीर है जो खुद को जनता का मसीहा बताते तो हैं परंतु अपने आसपास से बेखबर होते हैं ?यह तस्वीर केवल जिम्मेदार प्रशासन के साथ स्थानीय जनप्रतिनिधियों का मुखौटा ही नहीं उतारता .. क्या इस तरह अपने आस पास पनपते अव्यवस्था और इस तरह के समस्याओं के निदान किये बिना हम स्वच्छता ,आत्मनिर्भरता , विकास और सुनहरे भविष्य के रास्ते आगे बढ़ सकते हैं यह विचारणीय सवाल है ?

इसमें कोई दो मत नहीं कि जब इस तरह यहां नशेड़ियों का जमघट लगता है और महफिले सजती है तो किसी दिन ईश्वर ना करें पर यहां गंभीर दुर्घटना हो जाए तब शायद शहर में बुनियादी समस्याओं को लेकर बयानबाजी करने वाले और तस्वीर खींचा कर राजनीति करने वालों की नींद खुलेगी और फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो जाएगा अपने -अपने हितों की रोटी से की जाएगी.. अगर ऐसा नहीं है तो क्या जानबूझकर उन दिनों का इंतजार किया जा रहा है
*साइड इफेक्ट*

शहरी क्षेत्रों से शराब की दुकानों को हटाए जाने की मांग होती रही है इस व्यवसायिक परिसर से कुछ दूरी पर स्थित शराब भट्टी स्थित है तो इसमें आश्चर्य क्या कि इस तस्वीर को मौजूदा हालत का साइड इफेक्ट कहा जाए ।

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