रविन्द्र चौबे ने कहा- कोरोना मंदी के दौर में भी छत्तीसगढ़ का बाजार रहा गुलजार, जल्द ही खुशियां वापस लौटेंगी

रायपुर, छत्तीसगढ़ सरकार के कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने कहा कि कोरोना के चलते मंदी के दौर में भी छत्तीसगढ़ का बाजार गुलजार रहा। जल्द ही छत्तीसगढ़ में खुशियां वापस लौट आईं।

रेड क्रास सोसायटी के हाल में मीडिया से बातचीत करते हुए रविन्द्र चौबे ने कहा कि 17 दिसंबर को भूपेश बघेल सरकार के 2 साल पूरे होने जा रहे हैं। जब हमारी सरकार बनी नारा दिया गया था गड़बो नवा छत्तीसगढ़। नारे की सार्थकता दिखाई देने लगी है। नारे तो और भी चले हुए हैं- भूपेश है तो भरोसा है एवं बात है स्वाभिमान की। छत्तीसगढ़ के मूल वासियों को अब जाकर लगने लगा है कि यह उनका अपना प्रदेश है। इसके पहले के लोगों ने तो इसे शोषण और भ्रष्टाचार का राज्य बना दिया था। यहां के लोहा और अन्य खनिजों को बाहर बेचने का खूब खेल चला। दो साल में छत्तीसगढ़ को उसकी अस्मिता की पहचान वापस दिलाई गई। लोग यहां के तीज त्यौहारों तक को भूलते जा रहे थे, उन्हें जोर-शोर से मनाने का क्रम वापस शुरु किया गया। यह संदेश जा चुका है कि यहां थोपी गई अस्मिता नहीं चलेगी। पिछले 11 महीनों में कोरोना से लड़ाई सबसे ज्यादा बेहतर तरीके से छत्तीसगढ़ में लड़ी गई। 107 स्पेशल ट्रेन चलवाकर 7 लाख श्रमिक दूसरे राज्यों से यहां वापस लाए गए। कोरोना काल में यहां के अफसरों व कर्मचारियों ने 30 प्रतिशत तक अपने वेतन में कटौती करवाकर अर्थव्यवस्था को संभाले रखने में योगदान दिया। ऐसे कठिन समय में भी छत्तीसगढ़ की औद्योगिक गतिविधियां ठप्प नहीं होने पाईं। इस बीच केन्द्र सरकार ने 20 लाख करोड़ के पैकेज की घोषणा की, लेकिन यहां किसी गरीब या किसान के खाते में 20 रुपये भी नहीं पहुंचे।

रविन्द्र चौबे ने कहा कि भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री की शपथ लेने के तूरंत बाद किसानों का 9 हजार करोड़ रुपये का कर्जा माफ किया था। पूरे देश में किसान आंदोलन चल रहा है। हर तरफ जद्दोजहद है। बिहार में 900 रुपये तो झारखंड एवं ओड़़िशा में 1100 रुपये समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी हो रही है। वहीं छत्तीसगढ़ 2500 रुपये समर्थन मूल्य पर धान खरीद रहा है। छत्तीसगढ़ में लागू की गई राजीव गांधी किसान न्याय योजना ऐसी है कि जिसका ड्राफ्ट देखने के लिए केन्द्र सरकार ने मंगाया है। हमने लक्ष्य निर्धारित किया है कि 23 हजार करोड़ से अधिक की राशि किसानों के खातों में जाए। हमारी सरकार ने 17 लाख किसानों का 200 करोड़ सिंचाई टैक्स भी माफ किया। पिछली सरकार के समय बस्तर के लोहांडीगुड़ा में 5200 एकड़ जमीन संयंत्र लगाने के नाम पर ले ली गई थी। न तो संयंत्र लगा और न ही किसानों को जमीन लौटाई गई थी। हमारी सरकार ने सबसे पहले किसानों की जमीनों को लौटाने का काम किया। हमारी सरकार ने धान खरीदी केन्द्र बढ़ाए। खरीदी केन्द्रों में शेड लगवाए व चबूतरे बनवाए। हम गोधन न्याय योजना लेकर आए हैं। 6430 गोठान का निर्माण कर लिया गया है। 36 लाख गो पालकों के लिए 60 करोड़ से अधिक की राशि स्थानांतरित कर दी गई है।

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