एकता और सद्भाव की मिसाल हज़रत शेर अली आगा…. उर्स पर विशेष,,,, एक ऐसी दरगाह जहां लोग स्वस्थ्य लाभ उठाते है -हज़रत बन्दे अली शाह -उर्फ अस्पताल वाले बाबा

रायपुर।छत्तीसगढ़ के रायपुर में एक मुस्लिम संत सैयद शेर अली आगा की एक दरगाह हिन्दू मुस्लिम एकता की शानदार मिसाल बन गयी है। बंजारी वाले बाबा के नाम से विख्यात इस दरगाह पर सिर्फ मुस्लिम ही नही बड़ी तादाद में हिन्दू और दूसरे सम्प्रदाय के लोग भी मन्नत मांगने आते है। यहां आने वाले लोगो की आस्था इस दरगाह में कुछ ऐसी है कि हिन्दू इस दरगाह को मंदिर मानते है तो मुस्लिम भी अल्लाह का घर। रायपुर के शास्त्री चौक पर बंजारी वाले बाबा की दरगाह में जाति धर्म से ऊपर सा म्प्रदायिक सद्भाव की शानदार मिसाल दिखाई देती है। बंजारी वाले बाबा का असली नाम सैयद शेर अली आगा है। रायपुर के बंजारी वाले मंदिर के बाहर अपना दरबार लगाने की वजह से सैयद शेर शाह को बंजारी वाले बाबा के नाम से लोग जानते है। 1965 में अफगानिस्तान से आये सैयद शेर अली आगा ने रायपुर के बंजारी वाले मंदिर के पास एक दुकान के बाहर अपना डेरा डाला। बदन पर सिर्फ एक कपड़ा ढके सैयाद शेर अली बाबा के चमत्कार की जब धीरे धीरे पूरे इलाके में चर्चा होने लगी। छोटी सी जगह में शुरू हुआ बाबा का दरबार अब एक विशाल दरगाह में रूप ले चुका है।

 

छत्तीसगढ़ के रायपुर में एक मुस्लिम संत सैयद शेर अली आगा की एक दरगाह हिन्दू मुस्लिम एकता की शानदार मिसाल बन गयी है। बंजारी वाले बाबा के नाम से विख्यात इस दरगाह पर सिर्फ मुस्लिम ही नही बड़ी तादाद में हिन्दू और दूसरे सम्प्रदाय के लोग भी मन्नत मांगने आते है। यहां आने वाले लोगो की आस्था इस दरगाह में कुछ ऐसी है कि हिन्दू इस दरगाह को मंदिर मानते है तो मुस्लिम भी अल्लाह का घर। रायपुर के शास्त्री चौक पर बंजारी वाले बाबा की दरगाह में जाति धर्म से ऊपर साम्प्रदायिक सद्भाव की शानदार मिसाल दिखाई देती है। बंजारी वाले बाबा का असली नाम सैयद शेर अली आगा है। रायपुर के बंजारी वाले मंदिर के बाहर अपना दरबार लगाने की वजह से सैयद शेर शाह को बंजारी वाले बाबा के नाम से लोग जानते है। 1965 में अफगानिस्तान से आये सैयद शेर अली आगा ने रायपुर के बंजारी वाले मंदिर के पास एक दुकान के बाहर अपना डेरा डाला। बदन पर सिर्फ एक कपड़ा ढके सैयाद शेर अली बाबा के चमत्कार की जब धीरे धीरे पूरे इलाके में चर्चा होने लगी। छोटी सी जगह में शुरू हुआ बाबा का दरबार अब एक विशाल दरगाह में रूप ले चुका है।

 

हजरत सैय्यद बंदे अली रहमतुल्लाह अलेह (अस्पताल वाले बाबा) की मजार घड़ी चौक डीकेएस अस्पताल के पीछे हैं। जो अस्पताल वाले बाबा के नाम से जानी जाती है। इनको अस्पताल वाले बाबा इसलिए कहा जाता है, क्योंकि यह अस्पताल के पीछे है, इसलिए इसका नाम पड़ा। वहीं दूसरी ओर यहां जितने भी अकीदतमंद लोग आते हैं, उनको तुरंत शिफा मिलती है। कहा जाता है कि अस्पताल वाले बाबा की करामतों में एक है, जहां मरीजों को तुरंत शिफा मिलती है। दरगाह के खादिम हाजी रमजान अली ने बताया कि पहले इन्हें जेल वाले बाबा के नाम से जानते थे। बाद में अस्पताल वाले बाबा के नाम से मशहूर हुए।

Related posts

Leave a Comment