किश्तों में कंबल…. देश के उन लाखों, करोङो ईमानदारों को जिन्हें ना कोई जानता है, ना जिनके लिए कोई तालियां बजती है उन्हें सलाम, मैं नत होता हूँ.

 

धार…एक अभियान(10/21)/नवीन श्रीवास्तव,पत्रकार

हे देश के ईमानदार लोगों मैं जानता हूं इस देश की सारी व्यवस्थाएं आप जैसे लोगों से चल रही..आप सब ही माँ भारती के असली लाल हैं मुझे यकीन है ..एक दिन सब ठीक हो जायेगा.. क्या हुआ की आप लोगों को कोई नहीं जानता,क्या हो गया कि जब सारे दुःख ,तकलीफों के बीच आप सब ईमानदारी से अपने हिस्से का काम करते हैं तो कोई तालियां नहीं बजाता.. आप सब जुटे रहें…दायित्वबोध लिए ईमानदारी से देश मजबूत होता है..गले में मैं फलाने…मैं ढेकाने.. का पोस्टर टांग कर घुमने वाले जयजयकार के बीच रहने वाले जोकरों से कुछ नहीं होने वाला..अपने महंगे कपड़ों के अंदर ऐसे लोग निपट नंगे हैं ईमानदारी सहज नहीं ..बेईमानों के लिए तो ठीक वैसे ही है जैसे.. जहां जूते, चप्पल उतारते है वहां यह भी लिख दें कि यहां…अहंकार भी उतार दें..सोचिये कितना कठिन है हम अपने अंदर का अहम,अहंकार.. जूते, चप्पल की तरह तो पल भर में नहीं उतार सकते..। इन बेईमानों से,भरस्ट लोगों से कुछ नहीं हो सकता..डगर मुश्किल भरा है..पर याद रखना होगा सृजन के लिए..प्रसव वेदना से गुजरना ही है..पर इसके बाद आंनद ,हर्ष की किलकारियां भी गूंजती है और ऐसे जीवंत उष्ण हलचलों से गर्माहट भी । (जारी)

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