संविधान दिवस : बस्तर अधिकार मुक्तिमोर्चा ने बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर के मुर्ति पर माल्यार्पण कर संविधान के मुल्यों पर किया याद

 

बस्तर के हर वर्ग तक संविधान के अधिकारो को पहुंचाने का लिया संकल्प-

जगदलपुर।आज बस्तर अधिकार मुक्तिमोर्चा के द्वारा भारतीय संविधान के स्थापना दिवस पर जगदलपुर के लालबाग में स्थित अंबेडकर पार्क में बाबा भीमराव अंबेडकर की मुर्ति पर माल्यार्पण कर संविधान के मुल्यों पर अपने विचार प्रकट किए वहीं संविधान के प्रस्तावना को पढ़कर बस्तर के प्रत्येक वर्ग तक भारतीय संविधान के अधिकारो को मुल्यों को पहुंचाने की शपथ ली। मुक्ति मोर्चा के संभागीय संयोजक नवनीत चांद जी ने अपने वक्तव्य में कहा कि भारतीय संविधान देश के नागरिकों के जीवन शैली के आत्मा की तरह है। संविधान ने ही हम सभी अपने मौलिक अधिकार व कर्त्तव्य से परिचय करवाया, हमें राष्ट्र निर्माण में अपने बस्तर को विकसित बनाने के लिए बस्तर के प्रत्येक वर्ग को एक साथ लेकर चलना है, व बस्तर के अधिकार व विकास के लिए निरंतर संघर्ष करना है यही मुक्ति मोर्चा का लक्ष्य है। एंव जिला संयोजक भरत कश्यप ने कहा 26 नवंबर 1950 को ही भारतीय संविधान को अंगीकृत किया गया था। जिसे 26 जनवरी 1950 में पूरे देश में लागू किया गया। इन दोनों को बड़ी उत्साह के साथ मनाया जाता है। बाबासाहेब डॉ भीमराव अंबेडकर की कड़ी मेहनत से आजाद भारत का लोकतंत्रिक संविधान को 2साल 11महीने 18दिन में लिखा गया। जिसमें सम्पूर्ण समस्या का समाधान है। यह भारत देश की आत्मा है, भारतीय संविधान दुनिया का सबसे सर्वश्रेष्ठ संविधान माना जाता है यह एक कानून व्यवस्था के साथ-साथ एक सामाजिक दस्तावेज भी है जिसे लोगों का जीवन जीना बेहतर हुआ है। विकास मांझी,प्रमोद राय, निलकंट दास, चैतन्या साहू, सुरेंद्र तिवारी, मनीष गंढपाले, राकेश खापर्डे, कमलेश रामटेके,विकास ध्रुव,विक्की, मालिनी पवार,सी.एच.भारती,सोभा गंगोत्री,एकता,अनमती विश्वकर्मा, अंकिता गुरूदत्वा, रामेश्वरी साहू,मिना केसरवानी,मनमती नायक, सूनिता दास आदि उपस्थित थे*

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