बस्तर के सपनो के स्टील प्लांट का निजीकरण का फैसला बस्तर से विश्वासघात-मुक्तिमोर्चा

ट्रेड यूनियन के सर्व दलीय बैठक में बस्तर अधिकार मुक्तिमोर्चा ने रखी बस्तर हीत पर अपनी

केंद्र सरकार के नितीयो का विरोध कर राज्य सरकार से बस्तर हित मे प्लांट बचाने मुक्तिमोर्चा ने मांगा श्वेत पत्र

 

जगदलपुर ।बस्तर अधिकार मुक्तिमोर्चा के संयोजक नवनीत चाँद ने ट्रेड यूनियन द्वारा बुलाई गई सर्व दलीय बैठक में अपनी बात रखते हुए कहा कि ,बस्तर के हर नागरिक के विकास के सपनों को दिखा कर केंद्र व राज्य सरकार की मंशा पर देश की लौह उत्खन सरकारी कम्पनी NMDC ने सन 2001 में बैलाडीला स्थित लौह खदानों की लीज रिनिवल करवाने के लिए राज्य सरकार के नए कानून के तहत बस्तर के नगरनार में स्टील प्लांट लगाने की इच्छा जाहिर की, जिसे देखते हुए राज्य सरकार ने बस्तर के लोगो को विस्वाश में ले ,कई वादे कर जमीनों का अधिग्रहण किया गया यह जमीनों को लेने का शिलशिला 2010 तक चलता रहा है।

 

आज NMDC के पास लगभग 33 सो एकड़ जमीन है। जिसमे प्लांट बन कर तैयार हो रहा है। जिसकी लागत 20 हजार करोड़ से अधिक है। यह राशि जो इस मे लगी है। NMDC के मुनाफे की रकम में जो कम्पनी द्वारा बस्तर के लौहे को पानी के भाव खोद कर बेच कर कमाई गई है। आज जब बस्तर के सपनो का प्लांट बन कर तैयारी के कगार पर है। तो केंद्र सरकार इसे नुकशान में बता कर निजीकरण की राह अख्तियार कर डीमर्जर करने का फैसला ले चुकी हैं। यह विनेवशीकरण का शिलशिला केंद्र की यूपीए सरकार से प्रारम्भ हुआ और आज एन डी ए की सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया प्रारंभ अपनी अंतिम मुहर लगा दी है। यह सम्पूर्ण घटना कर्म बस्तर के विश्वास के साथ किया घात है। जो बस्तर के हर नागरिक क़भी नही भूलेगा,वही बस्तर के लोगो को राज्य सरकार से इस लड़ाई में सम्पूर्ण सहयोग की अपेक्षा थी। पर वो भी तब खत्म होती दिख रही है। जब बस्तर के विकास व हित की शर्तों को बिना शामिल किए ,न बस्तर के जनप्रतिनिधियों की सलाह लिए सीधे राज्य सरकार के मुख्यमंत्री ने NMDC के लौह खदानों को 2040 तक के लिए लीज रिनिवल कर दिया वो भी तब जब सुप्रीम कोर्ट के कॉमन काल जजमेंट के तहत राज्य सरकार के आदेश के तहत दन्तेवाड़ा कलेक्टर द्वारा 1600 करोड़ का जुर्माना नियम विरुद्ध उत्खन हेतु लगाया गया था। जिसमे मात्र 600 करोड़ रुपये जमा करवा कर कम्पनी द्वारा अपने पक्ष पर लीज रिनिवल करवा लिया गया ,जबकि कर्नाटक में कम्पनी की खदानों को राज्य सरकार ने 80 प्रतिशत प्रीमियम बढ़ाने की शर्त पर रोक लगा दी थी । मुक्तिमोर्चा ने अपने बयान में कहा कि ट्रेड यूनियन के द्वारा बुलाई गई बैठक में सर्व दलीय कमेटी का गठन हो ,जिसमे बस्तर के प्रत्येक वर्ग को जगह मिले व उस कमेटी के नेतृव में बस्तर के सभी जिलों में एक साथ आंदोलन का संखनाथ हो ,व केंद्र व राज्य सरकार की हर बस्तर विरोधी नितीयो को विरोध किया जाए।सभी राजनीतिक दल , संघठन व सामाजिक वर्ग को अपने स्वार्थ से ऊपर उठ कर बस्तर के हित मे एक साथ संघर्ष करना चाहिए इस कार्यक्रम में बस्तर अधिकार मुक्तिमोर्चा के सम्भागीय संयोजक नवनीत चाँद, जिला संयोजक भरत कश्यप, शहर महिला मोर्चा सयोजक श्रीमती शोभा गंगोत्रे, शहर युवा मोर्चा सयोजक शलेन्द्र वर्मा ,सह सयोजक एकता रानी,अंकिता गरुदत्ताजी,मालनी पवार ,नूपुर आचार्य ,फूलों देवी बघेल व समांनीय बस्तर संभाग के जनप्रतिनिधि ,समाजिक संघटन, व्यपारिक संघटन ,ट्रेड यूनियन व प्रभावित ग्राम वाशी उपस्थित थे।

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