वन अधिकार मान्यता पत्रधारियों को शासन की  योजनाओं का लाभ दिलाएं: डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम

 

मॉडल छात्रावासों के कार्यों में तेजी लाने के निर्देश

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विभागीय योजनाओं एवं निर्माण कार्यों की समीक्षा

 

आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विभागीय योजनाओं और निर्माण कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने व्यक्तिगत वन अधिकार मान्यता पत्रधारियों को शासन की सभी योजनाओं का लाभ दिलाने के निर्देश दिए। मंत्री श्री टेकाम ने वनभूमि पट्ाधारियों को कृषि एवं उद्यानिकी विभाग की योजनाओं का लाभ देने के साथ ही उन्हें नगदी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करने को कहा। वन अधिकार के संबंध में गांव की परम्परागत सीमा को ही मान्य करने तथा दो या दो से अधिक गांवों के मध्य सीमा-विवाद के मामलों का निराकरण ग्रामवासियों के सामंजस्य से करने के निर्देश दिए। इस दौरान आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास सचिव श्री डी.डी. सिंह, संचालक श्री शम्मी आबिदी सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
मंत्री डॉ. टेकाम ने कहा कि विभाग के द्वारा मुख्य रूप से छात्रावास, आश्रम, एकलव्य विद्यालय, प्रयास विद्यालय का संचालन किया जा रहा है। साथ ही वन अधिकार पट्टा के वितरण में विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि वन अधिकार पट्टों के वितरण में मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल द्वारा समय-समय पर दिए गए निर्देशों के परिणाम स्वरूप आज छत्तीसगढ़ राज्य अग्रणी कार्यवाही करने वाले राज्यों की सूची में शामिल है। समीक्षा के दौरान बताया गया कि व्यक्तिगत वन अधिकार में स्वीकृत दावों की संख्या 4 लाख 50 हजार 504 है। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत वन अधिकार दावों के निराकरण के संबंध में वन अधिकार समिति को शामिल किया जाए। संबंधित व्यक्ति को उसके द्वारा उचित अभिलेख, गवाह, दस्तावेज प्रस्तुत करने का मौका दिया जाए। डॉ. टेकाम ने कहा कि रायगढ़, कोरबा और अन्य जगह जहां माईनिंग क्षेत्र प्रस्तावित हैं वहां भी वन अधिकार पत्र दिया जाना है। उन्होंने सामुदायिक दावों में नजरी नक्शे और चौहद्दी की शिकायत के निराकरण के संबंध में वन विभाग के अधिकारियों से चर्चा करने के निर्देश दिए। डॉ. टेकाम ने कहा कि वन अधिकार देने के साथ भूमि का कब्जा भी दिलाना सुनिश्चित करें और शासन की योजनाओं का लाभ संबंधितों को दिया जाए।
डॉ. टेकाम ने कहा कि प्रदेश में मॉडल छात्रावासों का निर्माण किया जाना है। बस्तर संभाग में मॉडल छात्रावासों के लिए 25 लाख रूपए की राशि स्वीकृत की गई है। उन्होंने कहा कि सभी संस्थाओं के अपने-अपने भवन है जिसमें मॉडल छात्रावास बनाने के लिए अन्य कार्य कराया जाना है। जिससे छात्र-छात्राओं को वहां का वातावरण अच्छा लगे, साफ पानी, लाइब्रेरी, गार्डन, सीसी टी.व्ही. कैमरा, सुविधायुक्त शौचालय आदि को व्यवस्थित करना है। डॉ. टेकाम ने बस्तर संभाग सहित धमतरी के छात्रावासों के कार्य जल्द से जल्द शुरू करने और इस संबंध में कलेक्टर से चर्चा करने के निर्देश अधिकारियों को दिए। उन्होंने नवीन स्वीकृत भवनों के निर्माण कार्य को शुरू कराए जाने से पूर्व निर्माण स्थल का मौका-मुआयना किए जाने के निर्देश विभाग के मुख्य अभियंता एवं कार्यपालन अभियंता को संयुक्त रूप से करने के निर्देश दिए।
डॉ. टेकाम ने कहा कि निकट भविष्य में जब भी छात्रावास-आश्रम खुलेंगे वहां दैनिक स्वच्छता और सेनेटाईजेशन के लिए राष्ट्रीय रोड नियंत्रक केन्द्र द्वारा जारी गाईडलाईन के आधार पर मानक संचालन प्रक्रिया का पालन करते हुए कार्यवाही की जाए। उन्होंने कहा कि छात्रावास-आश्रम, एकलव्य और अन्य संस्थाओं के सभी कर्मचारियों को मानक संचालन की प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया जाए तथा इसका कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर पुनर्प्रशिक्षण एवं मूल्यांकन भी किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि क्योंकि कोरोना का प्रकोप अभी समाप्त नहीं हुआ है उससे बचने के लिए सभी उपाये निरंतर करते रहना पड़ेगा। अधिकारी विभागीय गतिविधियों का मैदानी क्षेत्र में भ्रमण कर अवलोकन करते रहें।
डॉ. टेकाम ने कहा कि एकलव्य विद्यालयों को विभागीय संस्थाओं में एक महत्वपूर्ण दर्जा मिला हुआ है। उद्देश्य होना चाहिए कि पुराने और नए खुलने वाले एकलव्य संस्थाओं में शैक्षणिक गुणवत्ता को सर्वोपरि रखकर कार्य करना है। एकलव्य में शिक्षकों की व्यवस्था शीघ्र कराएं, योग्य शिक्षकों का चयन करें। छात्र-छात्राओं को दैनिक उपयोग के लिए दी जाने वाली सामग्री में गुणवत्ता का ध्यान रखा जाए। विभाग को प्राप्त होने वाली राशि का अच्छे तरीके से उपयोग करें। जिन जिलों में तय समय में संचालन समिति की बैठक का आयोजन नहीं हो रहा है, वहां शीघ्र कार्यवाही के निर्देश दिए। डॉ. टेकाम ने कहा कि सभी एकलव्य विद्यालयों में सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू किए जाने की योजना है। इसको ध्यान में रखते हुए अधिकारियों को आवश्यक अधोसंरचना एवं अध्ययन-अध्यापन की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

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