उत्सव तो संजीवनी है..

 

 ..छत्तीसगढ़ राज्योत्सव…इस उत्सव में महसूस करें तो अपने पन की खुशबू है इस राज्योत्सव से छत्तीसगढ़ वासियों के स्वावलंबन की पसीने की खुशबू आती है इसमें सपनों की तासीर है और संस्कृति का मिजाज भी इसलिये यह उत्सव … रंगहीन गन्धहीन नहीं हो सकता पर इसे सहेज कर रखना तो होगा इस जुनून

 इस जिद के साथ कि यह आंखों के रास्ते दिल में उतर जाए इस

गंध में छत्तीसगढ़ की माटी …गोबर से महक रही देहरी… आंगन में तुलसी के साथ यहाँ के मिठास भरी उदार संस्कृति को आत्मसात करना होगा और इसी के साथ तन मन से निराशा, पिछड़ेपन, गरीबी,कुपोषण ,रोग, शोक को खत्म करने वाले गन्ध को भी शिद्दत से शामिल करना होगा ..ताकि यह हमारी मिट्टी की सौंधी महक में शामिल ..हो सके अभी बहुत काम है अमीरी गरीबी के भेद को खत्म करना है,दायित्व बोध चाहिए ..किसी नौटंकी से काम नहीं चलेगा कब तक किसी को उसके विकास के नाम पर तोहफे, सौगात बांटते रहेंगें..जागरण बहुत आवश्यक है. ध्यान रखें इस राज्योत्सव की खुशियां सबके लिए हो गांव गांव गली-गली चौपाल चौपाल से लेकर दुर्गम पगडंडियों तक..और आखिरी छोर में जी रहे किसी बिसाहू और सुर्बतिया तक इस कदर की वे ..नई शक्तियों से भर जाएं ..और राज्य की तस्वीर,तकदीर बदलने अपनी भागीदारी निभाने उठ खड़े हो..जय छत्तीसगढ़.. जय माँ भारती..राज्य स्थापना दिवस पर अशेष बधाई एवं शुभकामनाओं के साथ… नवीन श्रीवास्तव, पत्रकार

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