कांग्रेस का कृषि विधेयक का विरोध किसानो के साथ धोखा-बृजमोहन अग्रवाल



धान का पैसा नए विधेयक पर 3 दिन में देना पड़ेगा इसलिए विरोध

विशेष सत्र के पहले किसानों को इन बिंदुओ पर राहत दे सरकार

 

 

रायपुर/पूर्व मंत्री एवं भाजपा विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने कृषि विधेयक को लेकर ‘‘विशेष विधानसभा सत्र’’ बुलाने की तैयारियों को लेकर कांग्रेस पर तीखे आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस कृषि विधेयको को लेकर सिर्फ राजनीति कर रही है व किसानों को धोखा दे रही है। नए कृषि विधेयक से अब भूपेश सरकार को किसानों को धान का पैसा 3 दिन में ही देना पड़ेगा। सरकार साल-साल भर, किस्तों में भी पैसा नहीं दे पा रही है, इसलिए इस कानून का विरोध कर रही है।

श्री अग्रवाल ने कहा कि कांग्रेस सरकार विधेयक के विरोध व विधानसभा सत्र बुलाकर नए कानून बनाने के पहले इन सब बिन्दुओं पर त्वरित निर्णय लेकर किसानों को राहत दे व किसानों को धोखा देने की अपनी प्रवृत्ति बंद करें।

 

1. मंडियों में भी एमएसपी सुनिश्चित हो: प्रदेश की कांग्रेस सरकार से मांग है कि समर्थन मूल्य पर मंडियों में भी फसल बेचना खरीदना सुनिश्चित करे। एमएसपी से कम कीमत पर फसल बेचने को मजबूर होना प्रदेश में किसानों को बदहाली की गर्त में धकेल देगा। पहले छत्तीसगढ़ में एम.एस.पी. में धान खरीदी हो यह सुनिश्चित करें।

 

2. धान के कीमत की कुल राशि एकमुश्त दिए जायें: देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने नए कृषि कानून में यह स्पष्ट रूप से तय किया है कि किसानों को उनकी उपज का मूल्य तीन दिनों के भीतर मिल जाय। अतः इस सीजन से केंद्र के नए कानून के अनुसार 72 घंटे के भीतर एकमुश्त किसानों को भुगतान होना सुनिश्चित हो। पिछले सभी बकाया भुगतान भी एक साथ किया जायें।

 

3. प्रति एकड़ न्यूनतम 20 क्विंटल धान खरीदे जायें: केंद्र की भाजपा नीत सरकार ने केन्द्रीय पूल में डेढ़ गुना अधिक चावल खरीदने की घोषणा की है। अब केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ से 60 लाख टन चावल खरीदेगी। 60 लाख टन चावल के लिए 90 लाख टन धान की जरूरत होगी। अतः धरीदी की इस सीमा को 15 से बढ़ा कर 20 क्विंटल करना आवश्यक है।

 

4. एक नवम्बर से धान खरीदी शुरू किये जायें: पिछले सत्र में अंतिम समय तक धान खरीदी को लेकर अनिश्चितता रही। तब प्रदेश सरकार पूरी तरह कन्फ्यूज दिखी थी। समूचे प्रदेश में अफरातफरी का माहौल था, जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ा। अतः पूर्व की भाजपा सरकार की तरह ही धान खरीदी एक नवम्बर से शुरू किये जायें।

 

5. दो वर्ष के बकाये बोनस का भुगतान शीघ्र किये जायें: घोषणा पत्र में स्पष्ट वादा करने के बावजूद आजतक किसानों के दो साल के बकाये बोनस का भुगतान नहीं किया गया जाना किसानों के साथ विश्वासघात है। यह भुगतान शीघ्र सुनिश्चित हो।

 

6. धान का रकबा कम करने की कवायद बंद हो: गिरदावरी के बहाने प्रदेश में शासन द्वारा किसानों का रकबा घटाने की कोशिश हो रही है। शासन को दाना-दाना धान खरीदी के अपने कर्तव्य से बचने की ऐसी कोई कोशिश नहीं करना चाहिए। किसानों का रकबा एक इंच भी नहीं घटाये जायें।

 

7. भंडारण-परिवहन के नाम पर अब किसानों की प्रताड़ना न हो: केंद्र सरकार द्वारा कानून बनाकर अब फसल के भण्डारणध्परिवहन की आजादी सबको दी गयी है। उस कानून का सम्मान करते हुए कांग्रेस सरकार यह घोषणा करे कि ऐसे किसी बहाने से अब वह किसानों को परेशान नहीं करेगी, उन पर दमनकारी मुकदमें आदि नहीं करेगी।

 

8. पीड़ित किसानों को मुआवजा दिए जायें: प्रदेश के कांग्रेस के 2 साल के शासन काल में नकली बीज, कीटनाशक से बर्बाद हुए फसल के कारण आत्महत्याओं की दुर्भाग्यजनक खबरें लगातार आ रही है। अतः बिचैलियों, कम्पनियों पर लगाम लगाए जायें। जिनपर इसे रोकने का दायित्व है, उनकी जिम्मेदारी तय हो। आत्महत्या करने वाले किसानों के परिजनों को उचित मुआवजा दिए जायें। प्रदेश में बाढ़, अतिवृष्टि एवं अन्य आपदाओं से फसल को काफी नुकसान हुआ है, ऐसे सभी पीड़ित किसानों को भी क्षतिपूर्ति दिए जायें।

 

श्री अग्रवाल ने कहा कि कांग्रेस पहले इन सब किसान से सम्बंधित विषयों पर निर्णय लेकर किसान को समस्याओं से मुक्ति दिलवाये । किसानों के लिए घड़ियाली आंसू बहाना बढ़ कर , किसानों का अपमान व शोषण बाद करे । फिर केन्द्र के विधेयक के विरोध व विधानसभा सत्र के विशेष आयोजन के बारे में सोंचे।

 

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